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		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__NOTOC__&amp;lt;sidebar&amp;gt;sidebar-essentials&amp;lt;/sidebar&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
परमेश्‍वर ने हमें अपना वचन यानी पवित्र शास्त्र दिया है ताकि हम जान सकें कि वह कौन है और वे हमसे क्या चाहते हैं। हम बाइबिल इसीलिए पढ़ते हैं ताकी परमेश्वर को बेहतर तरीके से जान पाएं और वो काम कर सकें जो परमेश्वर चाहते हैं। ये सिद्धांत हर जगह समान हैं। लेकिन सवाल यह है कि: कहाँ से पढ़ना शुरू किया जाए? आपकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न सुझाव दिए हैं। इन संस्करणों में पृष्ठ स्मृति की मूल संरचना समान है,पर सिर्फ सुझाये गये पाठ अलग है। नीचे की ओर आपको कुछ &amp;quot;आदर्श&amp;quot; संस्करण मिलेंगें जो लुका की किताब और प्रेरितों के काम से अध्ययन शुरू करने का सुझाव देते हैं ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===[[Bible Reading Hints (Seven Stories full of Hope)/hi|बाइबिल पढ़ने हेतु सहायक-बिंदु(आशा भरी सात कथाएं)]]=== &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*इसमें नया नियम की सात कहानियों का चयन शामिल है|&lt;br /&gt;
*&amp;quot;आधुनिक पश्चिमी&amp;quot; पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए अच्छा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===[[Bible Reading Hints (Starting with the creation)/hi|बाइबिल पढ़ने हेतु सहायक-बिंदु (सृष्टि से शुरुआत करें)]]===&lt;br /&gt;
*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
*मुस्लिम समाज के लोगों के लिए यहां से शुरुआत करना अच्छा है।&lt;br /&gt;
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;परमेश्‍वर ने हमें अपना वचन यानी पवित्र शास्त्र दिया है ताकि हम जान सकें कि वह कौन है और वे हमसे क्या चाहते हैं। हम बाइबिल इसीलिए पढ़ते हैं ताकी परमेश्वर को बेहतर तरीके से जान पाएं और वो काम कर सकें जो परमेश्वर चाहते हैं। ये सिद्धांत हर जगह समान हैं। लेकिन सवाल यह है कि: कहाँ से पढ़ना शुरू किया जाए? आपकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न सुझाव दिए हैं। इन संस्करणों में पृष्ठ स्मृति की मूल संरचना समान है,पर सिर्फ सुझाये गये पाठ अलग है। नीचे की ओर आपको कुछ &amp;quot;आदर्श&amp;quot; संस्करण मिलेंगें जो लुका की किताब और प्रेरितों के काम से अध्ययन शुरू करने का सुझाव देते हैं ।&lt;/div&gt;</summary>
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परमेश्‍वर ने हमें अपना वचन यानी पवित्र शास्त्र दिया है ताकि हम जान सकें कि वह कौन है और वे हमसे क्या चाहते हैं। हम बाइबिल इसीलिए पढ़ते हैं ताकी परमेश्वर को बेहतर तरीके से जान पाएं और वो कर काम कर सकें जो परमेश्वर चाहते हैं। ये सिद्धांत हर जगह समान हैं। लेकिन सवाल यह है कि: कहाँ से पढ़ना शुरू किया जाए? आपकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न सुझाव दिए हैं। इन संस्करणों में पृष्ठ स्मृति की मूल संरचना समान है,पर सिर्फ सुझाये गये पाठ अलग है। नीचे की ओर आपको कुछ &amp;quot;आदर्श&amp;quot; संस्करण मिलेंगें जो लुका की किताब और प्रेरितों के काम से अध्ययन शुरू करने का सुझाव देते हैं ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===[[Bible Reading Hints (Seven Stories full of Hope)/hi|बाइबिल पढ़ने हेतु सहायक-बिंदु(आशा भरी सात कथाएं)]]=== &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*इसमें नया नियम की सात कहानियों का चयन शामिल है|&lt;br /&gt;
*&amp;quot;आधुनिक पश्चिमी&amp;quot; पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए अच्छा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===[[Bible Reading Hints (Starting with the creation)/hi|बाइबिल पढ़ने हेतु सहायक-बिंदु (सृष्टि से शुरुआत करें)]]===&lt;br /&gt;
*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
*मुस्लिम समाज के लोगों के लिए यहां से शुरुआत करना अच्छा है।&lt;br /&gt;
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परमेश्‍वर ने हमें अपना वचन यानी पवित्र शास्त्र दिया है ताकि हम जान सकें कि वह कौन है और वे हमसे क्या चाहते हैं। हम बाइबिल इसीलिए पढ़ते हैं ताकी परमेश्वर को बेहतर तरीके से जान पाएं और वो कर काम कर सकें जो परमेश्वर चाहते हैं। ये सिद्धांत हर जगह समान हैं। लेकिन सवाल यह है कि: कहाँ से पढ़ना शुरू किया जाए? आपकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न सुझाव दिए हैं। इन संस्करणों में पृष्ठ स्मृति की मूल संरचना समान है,पर सिर्फ सुझाये गये पाठ अलग है। नीचे की ओर आपको कुछ &amp;quot;आदर्श&amp;quot; संस्करण मिलेंगें जो लुका की किताब और प्रेरितों के काम से अध्ययन शुरू करने का सुझाव देते हैं ।&lt;br /&gt;
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*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
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परमेश्‍वर ने हमें अपना वचन यानी पवित्र शास्त्र दिया है ताकि हम जान सकें कि वह कौन है और वे हमसे क्या चाहते हैं। हम बाइबिल इसीलिए पढ़ते हैं ताकी परमेश्वर को बेहतर तरीके से जान पाएं और वो कर काम कर सकें जो परमेश्वर चाहते हैं। ये सिद्धांत हर जगह समान हैं। लेकिन सवाल यह है कि: कहाँ से पढ़ना शुरू किया जाए? आपकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न सुझाव दिए हैं। इन संस्करणों में पृष्ठ स्मृति की मूल संरचना समान है,पर सिर्फ सुझाये गये पाठ अलग है। नीचे की ओर आपको कुछ &amp;quot;आदर्श&amp;quot; संस्करण मिलेंगें जो लुका की किताब और प्रेरितों के काम से अध्ययन शुरू करने का सुझाव देते हैं ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===[[Bible Reading Hints (Seven Stories full of Hope)/hi|बाइबिल पढ़ने हेतु सहायक-बिंदु(आशा भरी सात कथाएं)]]=== &lt;br /&gt;
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*&amp;quot;आधुनिक पश्चिमी&amp;quot; पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए अच्छा है।&lt;br /&gt;
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परमेश्‍वर ने हमें अपना वचन यानी पवित्र शास्त्र दिया है ताकि हम जान सकें कि वह कौन है और वे हमसे क्या चाहते हैं। हम बाइबिल इसीलिए पढ़ते हैं ताकी परमेश्वर को बेहतर तरीके से जान पाएं और वो कर काम कर सकें जो परमेश्वर चाहते हैं। ये सिद्धांत हर जगह समान हैं। लेकिन सवाल यह है कि: कहाँ से पढ़ना शुरू किया जाए? आपकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न सुझाव दिए हैं। इन संस्करणों में पृष्ठ स्मृति की मूल संरचना समान है,पर सिर्फ सुझाये गये पाठ अलग है। नीचे की ओर आपको कुछ &amp;quot;आदर्श&amp;quot; संस्करण मिलेंगें जो लुका की किताब और प्रेरितों के काम से अध्ययन शुरू करने का सुझाव देते हैं ।&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
*इसमें नया नियम की सात कहानियों का चयन शामिल है|&lt;br /&gt;
*&amp;quot;आधुनिक पश्चिमी&amp;quot; पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए अच्छा है।&lt;br /&gt;
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*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
*मुस्लिम समाज के लोगों के लिए यहां से शुरुआत करना अच्छा है।&lt;br /&gt;
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*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
*मुस्लिम समाज के लोगों के लिए यहां से शुरुआत करना अच्छा है।&lt;/div&gt;</summary>
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*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
*मुस्लिम समाज के लोगों के लिए यहां से शुरुआत करना अच्छा है।&lt;br /&gt;
{{Translatable template|BibleReadingHints|books=LA|questions=HHH}}{{PdfDownload|बाईबल_पढ़ते_समय_संकेत.pdf}}{{PrintPdfDownload|बाईबल_पढ़ते_समय_संकेत_प्रिंट.pdf}}{{OdtDownload|बाईबल_पढ़ते_समय_संकेत.odt}}{{Version|2.0}}&lt;/div&gt;</summary>
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&lt;div&gt;===[[Bible Reading Hints (Seven Stories full of Hope)/hi|बाइबिल पढ़ने हेतु सहायक-बिंदु(आशा भरी सात कथाएं)]]=== &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*इसमें नया नियम की सात कहानियों का चयन शामिल है|&lt;br /&gt;
*&amp;quot;आधुनिक पश्चिमी&amp;quot; पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए अच्छा है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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&lt;hr /&gt;
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&lt;hr /&gt;
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&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
परमेश्‍वर ने हमें अपना वचन यानी पवित्र शास्त्र दिया है ताकि हम जान सकें कि वह कौन है और वे हमसे क्या चाहते हैं। हम बाइबिल इसीलिए पढ़ते हैं ताकी परमेश्वर को बेहतर तरीके से जान पाएं और वो कर काम कर सकें जो परमेश्वर चाहते हैं। ये सिद्धांत हर जगह समान हैं। लेकिन सवाल यह है कि: कहाँ से पढ़ना शुरू किया जाए? आपकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न सुझाव दिए हैं। इन संस्करणों में पृष्ठ स्मृति की मूल संरचना समान है,पर सिर्फ सुझाये गये पाठ अलग है। नीचे की ओर आपको कुछ &amp;quot;आदर्श&amp;quot; संस्करण मिलेंगें जो लुका की किताब और प्रेरितों के काम से अध्ययन शुरू करने का सुझाव देते हैं ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===[[Bible Reading Hints (Seven Stories full of Hope)/hi|बाईबल पढ़ते समय संकेत(आशा भरी सात कथाएं)]]=== &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*इसमें नया नियम की सात कहानियों का चयन शामिल है|&lt;br /&gt;
*&amp;quot;आधुनिक पश्चिमी&amp;quot; पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए अच्छा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===[[Bible Reading Hints (Starting with the creation)/hi|बाईबल पढ़ते समय संकेत (सृष्टि से शुरुआत करें)]]===&lt;br /&gt;
*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
*मुस्लिम समाज के लोगों के लिए यहां से शुरुआत करना अच्छा है।&lt;br /&gt;
{{Translatable template|BibleReadingHints|books=LA|questions=HHH}}{{PdfDownload|बाईबल_पढ़ते_समय_संकेत.pdf}}{{PrintPdfDownload|बाईबल_पढ़ते_समय_संकेत_प्रिंट.pdf}}{{OdtDownload|बाईबल_पढ़ते_समय_संकेत.odt}}{{Version|2.0}}&lt;/div&gt;</summary>
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&lt;hr /&gt;
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परमेश्‍वर ने हमें अपना वचन यानी पवित्र शास्त्र दिया है ताकि हम जान सकें कि वह कौन है और वे हमसे क्या चाहते हैं। हम बाइबिल इसीलिए पढ़ते हैं ताकी परमेश्वर को बेहतर तरीके से जान पाएं और वो कर काम कर सकें जो परमेश्वर चाहते हैं। ये सिद्धांत हर जगह समान हैं। लेकिन सवाल यह है कि: कहाँ से पढ़ना शुरू किया जाए? आपकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न सुझाव दिए हैं। इन संस्करणों में पृष्ठ स्मृति की मूल संरचना समान है,पर सिर्फ सुझाये गये पाठ अलग है। नीचे की ओर आपको कुछ &amp;quot;आदर्श&amp;quot; संस्करण मिलेंगें जो लुका की किताब और प्रेरितों के काम से अध्ययन शुरू करने का सुझाव देते हैं ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===[[Bible Reading Hints (Seven Stories full of Hope)/hi|बाईबल पढ़ते समय संकेत(आशा भरी सात कथाएं)]]=== &lt;br /&gt;
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*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
*मुस्लिम समाज के लोगों के लिए यहां से शुरुआत करना अच्छा है।&lt;br /&gt;
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परमेश्‍वर ने हमें अपना वचन यानी पवित्र शास्त्र दिया है ताकि हम जान सकें कि वह कौन है और वे हमसे क्या चाहते हैं। हम बाइबिल इसीलिए पढ़ते हैं ताकी परमेश्वर को बेहतर तरीके से जान पाएं और वो कर काम कर सकें जो परमेश्वर चाहते हैं। ये सिद्धांत हर जगह समान हैं। लेकिन सवाल यह है कि: कहाँ से पढ़ना शुरू किया जाए? आपकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न सुझाव दिए हैं। इन संस्करणों में पृष्ठ स्मृति की मूल संरचना समान है,पर सिर्फ सुझाये गये पाठ अलग है। नीचे की ओर आपको कुछ &amp;quot;आदर्श&amp;quot; संस्करण मिलेंगें जो लुका की किताब और प्रेरितों के काम से अध्ययन शुरू करने का सुझाव देते हैं ।&lt;br /&gt;
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*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
*मुस्लिम समाज के लोगों के लिए यहां से शुरुआत करना अच्छा है।&lt;br /&gt;
{{Translatable template|BibleReadingHints|books=LA|questions=HHH}}{{PdfDownload|बाईबल_पढ़ते_समय_संकेत.pdf}}{{PrintPdfDownload|Bible_Reading_Hints_print.pdf}}{{OdtDownload|बाईबल_पढ़ने_हेतु_पृष्ठ_स्मृति.odt}}{{Version|2.0}}&lt;/div&gt;</summary>
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परमेश्‍वर ने हमें अपना वचन यानी पवित्र शास्त्र दिया है ताकि हम जान सकें कि वह कौन है और वे हमसे क्या चाहते हैं। हम बाइबिल इसीलिए पढ़ते हैं ताकी परमेश्वर को बेहतर तरीके से जान पाएं और वो कर काम कर सकें जो परमेश्वर चाहते हैं। ये सिद्धांत हर जगह समान हैं। लेकिन सवाल यह है कि: कहाँ से पढ़ना शुरू किया जाए? आपकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न सुझाव दिए हैं। इन संस्करणों में पृष्ठ स्मृति की मूल संरचना समान है,पर सिर्फ सुझाये गये पाठ अलग है। नीचे की ओर आपको कुछ &amp;quot;आदर्श&amp;quot; संस्करण मिलेंगें जो लुका की किताब और प्रेरितों के काम से अध्ययन शुरू करने का सुझाव देते हैं ।&lt;br /&gt;
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*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
*मुस्लिम समाज के लोगों के लिए यहां से शुरुआत करना अच्छा है।&lt;br /&gt;
{{Translatable template|BibleReadingHints|books=LA|questions=HHH}}{{PdfDownload|बाईबल_पढ़ने_हेतु_पृष्ठ_स्मृति.pdf}}{{PrintPdfDownload|Bible_Reading_Hints_print.pdf}}{{OdtDownload|बाईबल_पढ़ने_हेतु_पृष्ठ_स्मृति.odt}}{{Version|2.0}}&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;===[[Bible Reading Hints (Starting with the creation)/hi|बाईबल पढ़ते समय संकेत (सृष्टि से शुरुआत करें)]]===&lt;br /&gt;
*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
*मुस्लिम समाज के लोगों के लिए यहां से शुरुआत करना अच्छा है।&lt;/div&gt;</summary>
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*उत्पत्ति, मत्ती और प्रेरितों के काम से पढ़ना शुरू करें।&lt;br /&gt;
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*&amp;quot;आधुनिक पश्चिमी&amp;quot; पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए अच्छा है।&lt;/div&gt;</summary>
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		<title>Baptism/hi</title>
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== कहानी ==&lt;br /&gt;
(मत्ती ३:११, १३ -१७; २८ :१८-२०)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|इससे पहले कि यीशु ने लोगों को सिखाना और उन्हें चंगा करना शुरू किया, वह यरदन नदी में बपतिस्मा लेने के लिए निकला। यूहन्ना नाम का एक भविष्यद्वक्ता वहाँ लोगों को अपने पापों से मुड़ने के लिए बुला रहा था क्योंकि उद्धारकर्ता जल्द ही आ रहा था। यीशु वह उद्धारकर्ता था जिसकी वे प्रतीक्षा कर रहे थे!}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|यीशु के पास पश्चाताप करने के लिए कोई पाप नहीं था, लेकिन वह यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लेना चाहता था ताकि हमारे लिए पालन करने और यूहन्ना के संदेश से सहमत होने के लिए एक उदाहरण बन सके। पहले तो यूहन्ना यीशु को बपतिस्मा देना नहीं चाहते थे और उनसे कहा, &amp;quot;मुझे तुम्हारे द्वारा बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है!&amp;quot; यूहन्ना जानता था कि यीशु उससे बहुत बड़ा था। हालाँकि, बाद में यीशु ने यूहन्ना से कहा कि यह सही बात है, तब यूहन्ना बपतिस्मा देने के लिए सहमत हुआ।}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|यूहन्ना ने यीशु को बपतिस्मा दिया। इसलिए यीशु पानी के नीचे चला गया और जब वह पानी से बाहर आया, तो स्वर्ग से परमेश्वर की आवाज ने कहा, “यह मेरा बेटा है जिसे मैं प्यार करता हूं; उसके साथ मैं बहुत खुश हूँ। ”}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|पृथ्वी पर उनकी सेवकाई के अंत में, यीशु ने अपने अनुयायियों को आज्ञा दी कि वे दुनिया के सभी लोगों के शिष्यों को जाने और उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर बपतिस्मा दें। उन्हें यह भी सिखाना था कि यीशु ने उन्हें जो कुछ भी आज्ञा दी थी उसका पालन करना चाहिए। उनके शिष्यों ने आज्ञा के अनुसार किया, और हर जगह वे चले गए, उन्होंने उन लोगों को बपतिस्मा दिया जिन्होंने यीशु के अनुयायी बनने का फैसला किया था।}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहानी को फिर से कहने का &amp;lt;b&amp;gt;अभ्यास&amp;lt;/b&amp;gt; करें!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== प्रशन ===&lt;br /&gt;
# इस कहानी से आप बपतिस्मा के बारे में क्या सीखते हैं?&lt;br /&gt;
# आपको क्या मानना चाहिए?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बपतिस्मा का अर्थ ==&lt;br /&gt;
शब्द &amp;quot;बपतिस्मा&amp;quot; का अर्थ है &amp;quot;को विसर्जित करना, डुबोना&amp;quot; सफाई या धुलाई के रूप में। जिस तरह यीशु को बपतिस्मा दिया गया था, हर कोई जो उसे मानता है उसे भी बपतिस्मा लेने की ज़रूरत है।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
मत्ती रचित सुसमाचार के अंत में यीशु अपने अनुयायियों को आज्ञा देते हैं:&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;quot;..उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।&amp;quot;(मत्ती २८:१९)&amp;lt;/br&amp;gt;&lt;br /&gt;
इस आयत का अर्थ प्रेरितों के काम २:३ (स्मृति छंद) में स्पष्ट हो जाता है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|पतरस ने उत्तर दिया, &amp;quot;आप में से प्रत्येक को अपने पापों का पश्चाताप करना चाहिए और परमेश्वर की ओर मुड़ना चाहिए, और अपने पापों की क्षमा के लिए यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लेना चाहिए। तब आपको पवित्र आत्मा का उपहार मिलेगा। ”}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;p style=&amp;quot;margin-top:1em;margin-bottom:-1em;text-align:center&amp;quot;&amp;gt;{{Translatable template|Italic|पिता के नाम के द्वारा शुद्ध होना...}}&amp;lt;/p&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाप को स्वीकार करना और पश्चाताप करना ===&lt;br /&gt;
हम अपने पापों को स्वीकार करते हैं और उनसे दूर हो जाते हैं। हम अपनी गलतियों को नहीं छिपाते हैं, लेकिन हम उन्हें नाम देते हैं और उन्हें स्वीकार करते हैं (1 यूहन्ना 1: 9)। हम बोलते हैं कि हम परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध कहाँ रहे थे|  हम परमेश्वर  से क्षमा मांगते हैं और फिर इन चीजों को करना बंद कर देते हैं। परमेश्वर की मदद से हम अपनी सोच और व्यवहार को बदलते हैं और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;p style=&amp;quot;margin-top:1em;margin-bottom:-1em;text-align:center&amp;quot;&amp;gt;{{Translatable template|Italic|पुत्र के नाम के द्वारा शुद्ध होना...}}&amp;lt;/p&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== यीशु मसीह के नाम से पानी का बपतिस्मा ===&lt;br /&gt;
पानी बपतिस्मा को &amp;quot;पुनर्जन्म की धुलाई&amp;quot; भी कहा जाता है (तीतुस ३:५ )।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
रोमियों ६:१-११ इस अर्थ को समझाता है:&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
उसी तरह से जब यीशु को दफनाया गया था और फिर जीवन के लिए फिर से उठाया गया था, हम बपतिस्मा में पानी के नीचे जाते हैं और एक नए जीवन के साथ पानी से बाहर आते हैं। हमारे पुराने पापी स्वभाव मर जाते हैं और अब हम &amp;quot;पाप के दास&amp;quot; नहीं हैं। इसका मतलब है कि हमें अब पाप नहीं करना है। अब हम एक &amp;quot;नई रचना&amp;quot; (2 कुरिन्थियों ५:१७) हैं। बपतिस्मा में हम अपने पुराने जीवन को दफन करते हैं और हमारा नया जीवन शुरू होता है, यीशु के उदाहरण द्वारा निर्देशित एक पूरी तरह से नई जीवन शैली।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;p style=&amp;quot;margin-top:1em;margin-bottom:-1em;text-align:center&amp;quot;&amp;gt;{{Translatable template|Italic|पवित्र आत्मा के नाम के द्वारा शुद्ध होना...}}&amp;lt;/p&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== परमेश्वर की आत्मा को प्राप्त करना ===&lt;br /&gt;
परमेश्वर हमें अपनी आत्मा देना चाहता है। पवित्र आत्मा हमारे लिए &amp;quot;परमेश्वर की शक्ति&amp;quot; की तरह है: वह हमें परमेश्वर की इच्छा और शैतान का विरोध करने में मदद करता है। वह हमारे लिए प्यार, खुशी, शांति और धैर्य जैसे अच्छे फल पैदा करता है (गलातियों ५ :२ २)।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
जब हम परमेश्वर की आत्मा को प्राप्त करते हैं, तो हमारे भीतर कुछ होता है और यह बाहर के साथ भी स्पष्ट हो जाता है (उदाहरण: प्रेरितों के काम १९:६)। हमें अलौकिक उपहार मिलते हैं (१ कुरिन्थियों १२: १-११ और १४: १-२५)। ये हमारे लिए एक समर्थन हैं और हम इनका उपयोग करते हैं ताकि अन्य लोग भी परमेश्वर की शक्ति का अनुभव कर सकें और हम उनका अनुसरण कर सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अपने बपतिस्मा की तैयारी कर रहा है == &lt;br /&gt;
आप अपने बपतिस्मे पर अपना विश्वास मना सकते हैं!&lt;br /&gt;
* बपतिस्मा कब होना चाहिए?&lt;br /&gt;
* हमें किसको आमंत्रित करना चाहिए?&lt;br /&gt;
* आपके बपतिस्मे पर आप परमेश्वर के साथ अपनी कहानी तैयार कर सकते हैं कि हर कोई यह बता सके कि परमेश्वर ने आपको कैसे बचाया और बदल दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल्द से जल्द बपतिस्मा लेने का समय निर्धारित करें। बपतिस्मा प्रश्नों के माध्यम से जाओ और किसी भी प्रश्न को हल करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बपतिस्मा संबंधी प्रश्न ==&lt;br /&gt;
# क्या तुमने अपने पापों को परमेश्वर के सामने कबूल किया?&lt;br /&gt;
# क्या आप जानते और मानते हैं कि परमेश्वर ने यीशु के बलिदान के माध्यम से आपके सभी पापों को क्षमा कर दिया है?&lt;br /&gt;
# क्या आप अपने पुराने जीवन को दफनाने और परमेश्वर के साथ एक नया जीवन शुरू करने के लिए तैयार हैं?&lt;br /&gt;
# क्या आप यीशु का अनुसरण करने और कभी पीछे नहीं हटने के लिए प्रतिबद्ध हैं?&lt;br /&gt;
# क्या आप यीशु का अनुसरण करते रहेंगे, भले ही वे आपका मजाक उड़ाएँ, आपको पीटें, आपका परिवार आपको बाहर निकालता है, या आपको अन्य कठिनाइयाँ होंगी?&lt;br /&gt;
# क्या आप पवित्र आत्मा को प्राप्त करना चाहते हैं?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{PdfDownload|बपतिस्मा.pdf}}&lt;br /&gt;
{{OdtDownload|बपतिस्मा.odt}}&lt;br /&gt;
{{Version|२.१}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.4training.net/index.php?title=Translations:Baptism/9/hi&amp;diff=50572</id>
		<title>Translations:Baptism/9/hi</title>
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		<updated>2020-09-27T15:19:43Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;आप अपने बपतिस्मे पर अपना विश्वास मना सकते हैं!&lt;br /&gt;
* बपतिस्मा कब होना चाहिए?&lt;br /&gt;
* हमें किसको आमंत्रित करना चाहिए?&lt;br /&gt;
* आपके बपतिस्मे पर आप परमेश्वर के साथ अपनी कहानी तैयार कर सकते हैं कि हर कोई यह बता सके कि परमेश्वर ने आपको कैसे बचाया और बदल दिया।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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	<entry>
		<id>https://www.4training.net/index.php?title=Baptism/hi&amp;diff=50571</id>
		<title>Baptism/hi</title>
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		<updated>2020-09-27T15:13:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__NOTOC__&amp;lt;sidebar&amp;gt;sidebar-essentials&amp;lt;/sidebar&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
== कहानी ==&lt;br /&gt;
(मत्ती ३:११, १३ -१७; २८ :१८-२०)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|इससे पहले कि यीशु ने लोगों को सिखाना और उन्हें चंगा करना शुरू किया, वह यरदन नदी में बपतिस्मा लेने के लिए निकला। यूहन्ना नाम का एक भविष्यद्वक्ता वहाँ लोगों को अपने पापों से मुड़ने के लिए बुला रहा था क्योंकि उद्धारकर्ता जल्द ही आ रहा था। यीशु वह उद्धारकर्ता था जिसकी वे प्रतीक्षा कर रहे थे!}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|यीशु के पास पश्चाताप करने के लिए कोई पाप नहीं था, लेकिन वह यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लेना चाहता था ताकि हमारे लिए पालन करने और यूहन्ना के संदेश से सहमत होने के लिए एक उदाहरण बन सके। पहले तो यूहन्ना यीशु को बपतिस्मा देना नहीं चाहते थे और उनसे कहा, &amp;quot;मुझे तुम्हारे द्वारा बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है!&amp;quot; यूहन्ना जानता था कि यीशु उससे बहुत बड़ा था। हालाँकि, बाद में यीशु ने यूहन्ना से कहा कि यह सही बात है, तब यूहन्ना बपतिस्मा देने के लिए सहमत हुआ।}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|यूहन्ना ने यीशु को बपतिस्मा दिया। इसलिए यीशु पानी के नीचे चला गया और जब वह पानी से बाहर आया, तो स्वर्ग से परमेश्वर की आवाज ने कहा, “यह मेरा बेटा है जिसे मैं प्यार करता हूं; उसके साथ मैं बहुत खुश हूँ। ”}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|पृथ्वी पर उनकी सेवकाई के अंत में, यीशु ने अपने अनुयायियों को आज्ञा दी कि वे दुनिया के सभी लोगों के शिष्यों को जाने और उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर बपतिस्मा दें। उन्हें यह भी सिखाना था कि यीशु ने उन्हें जो कुछ भी आज्ञा दी थी उसका पालन करना चाहिए। उनके शिष्यों ने आज्ञा के अनुसार किया, और हर जगह वे चले गए, उन्होंने उन लोगों को बपतिस्मा दिया जिन्होंने यीशु के अनुयायी बनने का फैसला किया था।}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहानी को फिर से कहने का &amp;lt;b&amp;gt;अभ्यास&amp;lt;/b&amp;gt; करें!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== प्रशन ===&lt;br /&gt;
# इस कहानी से आप बपतिस्मा के बारे में क्या सीखते हैं?&lt;br /&gt;
# आपको क्या मानना चाहिए?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बपतिस्मा का अर्थ ==&lt;br /&gt;
शब्द &amp;quot;बपतिस्मा&amp;quot; का अर्थ है &amp;quot;को विसर्जित करना, डुबोना&amp;quot; सफाई या धुलाई के रूप में। जिस तरह यीशु को बपतिस्मा दिया गया था, हर कोई जो उसे मानता है उसे भी बपतिस्मा लेने की ज़रूरत है।&lt;br /&gt;
&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
मत्ती रचित सुसमाचार के अंत में यीशु अपने अनुयायियों को आज्ञा देते हैं:&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;quot;..उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।&amp;quot;(मत्ती २८:१९)&amp;lt;/br&amp;gt;&lt;br /&gt;
इस आयत का अर्थ प्रेरितों के काम २:३ (स्मृति छंद) में स्पष्ट हो जाता है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|पतरस ने उत्तर दिया, &amp;quot;आप में से प्रत्येक को अपने पापों का पश्चाताप करना चाहिए और परमेश्वर की ओर मुड़ना चाहिए, और अपने पापों की क्षमा के लिए यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लेना चाहिए। तब आपको पवित्र आत्मा का उपहार मिलेगा। ”}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;p style=&amp;quot;margin-top:1em;margin-bottom:-1em;text-align:center&amp;quot;&amp;gt;{{Translatable template|Italic|पिता के नाम के द्वारा शुद्ध होना...}}&amp;lt;/p&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाप को स्वीकार करना और पश्चाताप करना ===&lt;br /&gt;
हम अपने पापों को स्वीकार करते हैं और उनसे दूर हो जाते हैं। हम अपनी गलतियों को नहीं छिपाते हैं, लेकिन हम उन्हें नाम देते हैं और उन्हें स्वीकार करते हैं (1 यूहन्ना 1: 9)। हम बोलते हैं कि हम परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध कहाँ रहे थे|  हम परमेश्वर  से क्षमा मांगते हैं और फिर इन चीजों को करना बंद कर देते हैं। परमेश्वर की मदद से हम अपनी सोच और व्यवहार को बदलते हैं और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;p style=&amp;quot;margin-top:1em;margin-bottom:-1em;text-align:center&amp;quot;&amp;gt;{{Translatable template|Italic|पुत्र के नाम के द्वारा शुद्ध होना...}}&amp;lt;/p&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== यीशु मसीह के नाम से पानी का बपतिस्मा ===&lt;br /&gt;
पानी बपतिस्मा को &amp;quot;पुनर्जन्म की धुलाई&amp;quot; भी कहा जाता है (तीतुस ३:५ )।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
रोमियों ६:१-११ इस अर्थ को समझाता है:&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
उसी तरह से जब यीशु को दफनाया गया था और फिर जीवन के लिए फिर से उठाया गया था, हम बपतिस्मा में पानी के नीचे जाते हैं और एक नए जीवन के साथ पानी से बाहर आते हैं। हमारे पुराने पापी स्वभाव मर जाते हैं और अब हम &amp;quot;पाप के दास&amp;quot; नहीं हैं। इसका मतलब है कि हमें अब पाप नहीं करना है। अब हम एक &amp;quot;नई रचना&amp;quot; (2 कुरिन्थियों ५:१७) हैं। बपतिस्मा में हम अपने पुराने जीवन को दफन करते हैं और हमारा नया जीवन शुरू होता है, यीशु के उदाहरण द्वारा निर्देशित एक पूरी तरह से नई जीवन शैली।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;p style=&amp;quot;margin-top:1em;margin-bottom:-1em;text-align:center&amp;quot;&amp;gt;{{Translatable template|Italic|पवित्र आत्मा के नाम के द्वारा शुद्ध होना...}}&amp;lt;/p&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== परमेश्वर की आत्मा को प्राप्त करना ===&lt;br /&gt;
परमेश्वर हमें अपनी आत्मा देना चाहता है। पवित्र आत्मा हमारे लिए &amp;quot;परमेश्वर की शक्ति&amp;quot; की तरह है: वह हमें परमेश्वर की इच्छा और शैतान का विरोध करने में मदद करता है। वह हमारे लिए प्यार, खुशी, शांति और धैर्य जैसे अच्छे फल पैदा करता है (गलातियों ५ :२ २)।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
जब हम परमेश्वर की आत्मा को प्राप्त करते हैं, तो हमारे भीतर कुछ होता है और यह बाहर के साथ भी स्पष्ट हो जाता है (उदाहरण: प्रेरितों के काम १९:६)। हमें अलौकिक उपहार मिलते हैं (१ कुरिन्थियों १२: १-११ और १४: १-२५)। ये हमारे लिए एक समर्थन हैं और हम इनका उपयोग करते हैं ताकि अन्य लोग भी परमेश्वर की शक्ति का अनुभव कर सकें और हम उनका अनुसरण कर सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अपने बपतिस्मा की तैयारी कर रहा है == &lt;br /&gt;
आप अपने बपतिस्मे पर अपना विश्वास मना सकते हैं!&lt;br /&gt;
* बपतिस्मा कब होना चाहिए?&lt;br /&gt;
* हमें किसको आमंत्रित करना चाहिए?&lt;br /&gt;
* आपके बपतिस्मे पर आप परमेश्वर के साथ अपनी कहानी तैयार कर सकते हैं कि हर कोई यह बता सके कि भगवान ने आपको कैसे बचाया और बदल दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल्द से जल्द बपतिस्मा लेने का समय निर्धारित करें। बपतिस्मा प्रश्नों के माध्यम से जाओ और किसी भी प्रश्न को हल करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बपतिस्मा संबंधी प्रश्न ==&lt;br /&gt;
# क्या तुमने अपने पापों को परमेश्वर के सामने कबूल किया?&lt;br /&gt;
# क्या आप जानते और मानते हैं कि परमेश्वर ने यीशु के बलिदान के माध्यम से आपके सभी पापों को क्षमा कर दिया है?&lt;br /&gt;
# क्या आप अपने पुराने जीवन को दफनाने और परमेश्वर के साथ एक नया जीवन शुरू करने के लिए तैयार हैं?&lt;br /&gt;
# क्या आप यीशु का अनुसरण करने और कभी पीछे नहीं हटने के लिए प्रतिबद्ध हैं?&lt;br /&gt;
# क्या आप यीशु का अनुसरण करते रहेंगे, भले ही वे आपका मजाक उड़ाएँ, आपको पीटें, आपका परिवार आपको बाहर निकालता है, या आपको अन्य कठिनाइयाँ होंगी?&lt;br /&gt;
# क्या आप पवित्र आत्मा को प्राप्त करना चाहते हैं?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{PdfDownload|बपतिस्मा.pdf}}&lt;br /&gt;
{{OdtDownload|बपतिस्मा.odt}}&lt;br /&gt;
{{Version|२.१}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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	<entry>
		<id>https://www.4training.net/index.php?title=Translations:Baptism/15/hi&amp;diff=50570</id>
		<title>Translations:Baptism/15/hi</title>
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		<updated>2020-09-27T15:13:36Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;यीशु के पास पश्चाताप करने के लिए कोई पाप नहीं था, लेकिन वह यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लेना चाहता था ताकि हमारे लिए पालन करने और यूहन्ना के संदेश से सहमत होने के लिए एक उदाहरण बन सके। पहले तो यूहन्ना यीशु को बपतिस्मा देना नहीं चाहते थे और उनसे कहा, &amp;quot;मुझे तुम्हारे द्वारा बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है!&amp;quot; यूहन्ना जानता था कि यीशु उससे बहुत बड़ा था। हालाँकि, बाद में यीशु ने यूहन्ना से कहा कि यह सही बात है, तब यूहन्ना बपतिस्मा देने के लिए सहमत हुआ।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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	<entry>
		<id>https://www.4training.net/index.php?title=God%27s_Story/hi&amp;diff=50569</id>
		<title>God&#039;s Story/hi</title>
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		<updated>2020-09-27T15:07:30Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
मानव जाति के साथ परमेश्वर की कहानी निश्चित रूप से लंबी है और इसमें अंतहीन विवरण हैं। यहाँ हम इसके सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि जिन लोगों के साथ आप इसे बाँट रहे हैं, वे इसे अच्छी तरह से समझ सकते हैं और देख सकते हैं कि यह उनके जीवन को कैसे प्रभावित करता है। लेकिन आपके दर्शकों की पृष्ठभूमि के आधार पर बड़े अंतर हो सकते हैं: लोग पहले से ही क्या जानते हैं? आमतौर पर कौन से पहलू उनके लिए बिल्कुल नए हैं?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसलिए हम विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हुए विभिन्न संस्करण प्रदान करते हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== [[परमेश्वर की कहानी (पांच उंगलियां) | परमेश्वर की कहानी (पांच उंगलियां)]] ==&lt;br /&gt;
* &amp;quot;आधुनिक पश्चिमी&amp;quot; पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए अच्छा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== [[परमेश्वर की कहानी (पहला और अंतिम बलिदान) | परमेश्वर की कहानी (पहला और अंतिम बलिदान)]] ==&lt;br /&gt;
* मानते हैं कि लोग पहले से ही दुनिया के निर्माण, मनुष्य के पतन के बारे में जानते हैं और बलिदान की अवधारणा से परिचित हैं।&lt;br /&gt;
* अच्छा है उन लोगों के लिए, उदाहरण जैसे मुस्लिम समाज।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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		<title>Translations:God&#039;s Story/17/hi</title>
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		<updated>2020-09-27T15:07:29Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;मानव जाति के साथ परमेश्वर की कहानी निश्चित रूप से लंबी है और इसमें अंतहीन विवरण हैं। यहाँ हम इसके सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि जिन लोगों के साथ आप इसे बाँट रहे हैं, वे इसे अच्छी तरह से समझ सकते हैं और देख सकते हैं कि यह उनके जीवन को कैसे प्रभावित करता है। लेकिन आपके दर्शकों की पृष्ठभूमि के आधार पर बड़े अंतर हो सकते हैं: लोग पहले से ही क्या जानते हैं? आमतौर पर कौन से पहलू उनके लिए बिल्कुल नए हैं?&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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		<id>https://www.4training.net/index.php?title=Time_with_God/hi&amp;diff=50567</id>
		<title>Time with God/hi</title>
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		<updated>2020-09-27T14:45:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__NOTOC__&amp;lt;sidebar&amp;gt;sidebar-essentials&amp;lt;/sidebar&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
यदि हम किसी व्यक्ति को जानना चाहते हैं, तो हमें उनके साथ नियमित संपर्क करने की आवश्यकता है। परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में भी ऐसा ही है: उन्हें बेहतर तरीके से जानने के लिए, हमें उसके साथ समय बिताने की जरूरत है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के साथ हमारे समय का उद्देश्य ==&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;परमेश्वर की आराधना करने के लिए&amp;lt;/b&amp;gt;: परमेश्वर हमारी प्रशंसा के योग्य है और हमारे समय के हकदार हैं।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;परमेश्वर के साथ बात करने के लिए&amp;lt;/b&amp;gt;: प्रार्थना में, हम उसके साथ बांटते हैं जो हमारे दिल में है। हम उसे सुनते हैं ताकि वह हमसे बात कर सके और हमारी अगुवाई कर सके।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;परमेश्वर से सीखने के लिए&amp;lt;/b&amp;gt;: परमेश्वर हमें अपने वचन, बाइबल और उसकी आत्मा के माध्यम से सिखाना चाहता है। यह हमारे लिए आध्यात्मिक भोजन की तरह है ताकि हम विकसित हो सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाइबल से उदाहरण ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|निम्नलिखित बाइबल छंदों को देखें और तालिका भरें: यह किस व्यक्ति के बारे में बात कर रहा है? कब, कहाँ और कैसे यह व्यक्ति परमेश्वर के साथ समय बिताता है?}}&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;wikitable&amp;quot; style=&amp;quot;width:100%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! scope=&amp;quot;col&amp;quot;| छंद&lt;br /&gt;
! scope=&amp;quot;col&amp;quot; style=&amp;quot;width:20%&amp;quot;| व्यक्ति&lt;br /&gt;
! scope=&amp;quot;col&amp;quot; style=&amp;quot;width:20%&amp;quot;| समय&lt;br /&gt;
! scope=&amp;quot;col&amp;quot; style=&amp;quot;width:20%&amp;quot;| स्थान&lt;br /&gt;
! scope=&amp;quot;col&amp;quot; style=&amp;quot;width:25%&amp;quot;| वास्तव में क्या?&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| भजन संहिता ५:३&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;text-align:center&amp;quot; | दाऊद&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;text-align:center&amp;quot; | सुबह के समय&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;text-align:center&amp;quot; | ?&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;text-align:center&amp;quot; | प्रार्थना करना और उत्तर की प्रतीक्षा करना&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| दानिय्येल ६:११ || || || || &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| मरकुस १:३५ || || || || &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| लूका  ६ :१२ || || || || &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| प्रेरितों के काम १० :९ || || || || &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| प्रेरितों के काम १६ :२५ || || || || &lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के साथ हमारे समय के लिए उपकरण और सुझाव == &lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;बाइबिल:&amp;lt;/b&amp;gt;बाइबिल से एक अंश पढ़ें और फिर उसके बारे में सोचें और प्रार्थना करें। आप इसके लिए सिर-दिल-हाथ के सवालों का उपयोग कर सकते हैं:&amp;lt;br/&amp;gt;&amp;lt;table&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Head-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;सिर:&amp;lt;/b&amp;gt; मैं यहाँ क्या सीखता हूं?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Heart-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;दिल:&amp;lt;/b&amp;gt; मेरे दिल को क्या छूता है?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Hands-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;हाथ:&amp;lt;/b&amp;gt; मैं इसे कैसे लागू कर सकता हूं?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;/table&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;स्थान:&amp;lt;/b&amp;gt; एक ऐसा स्थान चुनें जहाँ आप बिना विचलित हुए परमेश्वर से मिल सकते हैं।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;समय:&amp;lt;/b&amp;gt; सबसे अच्छा समय ढूंढें जब आप लगातार परमेश्वर से मिल सकते हैं।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;योजना:&amp;lt;/b&amp;gt; पढ़ने के लिए बाइबल की एक पुस्तक चुनें। शुरुआत के लिए, लूका और प्रेरितों के काम (नए नियम में से ) को पढ़ें।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;नोट्स बनाना और नोट्स बांटना :&amp;lt;/b&amp;gt; अपने दोस्तों के साथ अपने विचारों को लिखिए या बतायें, जो आपको लगता है कि परमेश्वर आपसे कह रहा है, आपके प्रश्न, आपके या आपके दोस्तों के प्रार्थना अनुरोध, कैसे परमेश्वर ने प्रार्थना का उत्तर दिया, छंद को प्रोत्साहित किया,…&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के साथ मेरे समय के लिए मेरी प्रतिबद्धता ==&lt;br /&gt;
समय:&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
स्थान:&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
योजना:&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{PdfDownload|परमेश्वर_के_साथ_का_समय.pdf}}&lt;br /&gt;
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&lt;hr /&gt;
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&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
यदि हम किसी व्यक्ति को जानना चाहते हैं, तो हमें उनके साथ नियमित संपर्क करने की आवश्यकता है। परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में भी ऐसा ही है: उन्हें बेहतर तरीके से जानने के लिए, हमें उसके साथ समय बिताने की जरूरत है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के साथ हमारे समय का उद्देश्य ==&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;परमेश्वर की आराधना करने के लिए&amp;lt;/b&amp;gt;: परमेश्वर हमारी प्रशंसा के योग्य है और हमारे समय के हकदार हैं।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;परमेश्वर के साथ बात करने के लिए&amp;lt;/b&amp;gt;: प्रार्थना में, हम उसके साथ बांटते हैं जो हमारे दिल में है। हम उसे सुनते हैं ताकि वह हमसे बात कर सके और हमारी अगुवाई कर सके।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;परमेश्वर से सीखने के लिए&amp;lt;/b&amp;gt;: परमेश्वर हमें अपने वचन, बाइबल और उसकी आत्मा के माध्यम से सिखाना चाहता है। यह हमारे लिए आध्यात्मिक भोजन की तरह है ताकि हम विकसित हो सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाइबल से उदाहरण ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|निम्नलिखित बाइबल छंदों को देखें और तालिका भरें: यह किस व्यक्ति के बारे में बात कर रहा है? कब, कहाँ और कैसे यह व्यक्ति परमेश्वर के साथ समय बिताता है?}}&lt;br /&gt;
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| भजन संहिता ५:३&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
| दानिय्येल ६:११ || || || || &lt;br /&gt;
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| मरकुस १:३५ || || || || &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| लूका  ६ :१२ || || || || &lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के साथ हमारे समय के लिए उपकरण और सुझाव == &lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;बाइबिल:&amp;lt;/b&amp;gt;बाइबिल से एक अंश पढ़ें और फिर उसके बारे में सोचें और प्रार्थना करें। आप इसके लिए सिर-दिल-हाथ के सवालों का उपयोग कर सकते हैं:&amp;lt;br/&amp;gt;&amp;lt;table&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Head-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;सिर:&amp;lt;/b&amp;gt; मैं यहां क्या सीखता हूं?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Heart-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;दिल:&amp;lt;/b&amp;gt; मेरे दिल को क्या छूता है?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Hands-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;हाथ:&amp;lt;/b&amp;gt; मैं इसे कैसे लागू कर सकता हूं?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;/table&amp;gt;&lt;br /&gt;
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* &amp;lt;b&amp;gt;समय:&amp;lt;/b&amp;gt; सबसे अच्छा समय ढूंढें जब आप लगातार परमेश्वर से मिल सकते हैं।&lt;br /&gt;
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* &amp;lt;b&amp;gt;नोट्स बनाना और नोट्स बांटना :&amp;lt;/b&amp;gt; अपने दोस्तों के साथ अपने विचारों को लिखिए या बतायें, जो आपको लगता है कि परमेश्वर आपसे कह रहा है, आपके प्रश्न, आपके या आपके दोस्तों के प्रार्थना अनुरोध, कैसे परमेश्वर ने प्रार्थना का उत्तर दिया, छंद को प्रोत्साहित किया,…&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के साथ मेरे समय के लिए मेरी प्रतिबद्धता ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
यदि हम किसी व्यक्ति को जानना चाहते हैं, तो हमें उनके साथ नियमित संपर्क करने की आवश्यकता है। परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में भी ऐसा ही है: उन्हें बेहतर तरीके से जानने के लिए, हमें उसके साथ समय बिताने की जरूरत है।&lt;br /&gt;
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* &amp;lt;b&amp;gt;परमेश्वर की आराधना करने के लिए&amp;lt;/b&amp;gt;: परमेश्वर हमारी प्रशंसा के योग्य है और हमारे समय के हकदार हैं।&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== बाइबल से उदाहरण ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|निम्नलिखित बाइबल छंदों को देखें और तालिका भरें: यह किस व्यक्ति के बारे में बात कर रहा है? कब, कहाँ और कैसे यह व्यक्ति परमेश्वर के साथ समय बिताता है?}}&lt;br /&gt;
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| भजन संहिता ५:३&lt;br /&gt;
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| style=&amp;quot;text-align:center&amp;quot; | सुबह के समय&lt;br /&gt;
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| दानिय्येल ६:११ || || || || &lt;br /&gt;
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| मरकुस १:३५ || || || || &lt;br /&gt;
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| लूका  ६ :१२ || || || || &lt;br /&gt;
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== परमेश्वर के साथ हमारे समय के लिए उपकरण और सुझाव == &lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;बाइबिल:&amp;lt;/b&amp;gt;बाइबिल से एक अंश पढ़ें और फिर उसके बारे में सोचें और प्रार्थना करें। आप इसके लिए सिर-दिल-हाथ के सवालों का उपयोग कर सकते हैं:&amp;lt;br/&amp;gt;&amp;lt;table&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Head-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;सिर:&amp;lt;/b&amp;gt; मैं यहां क्या सीखता हूं?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Heart-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;दिल:&amp;lt;/b&amp;gt; मेरे दिल को क्या छूता है?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Hands-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;हाथ:&amp;lt;/b&amp;gt; मैं इसे कैसे लागू कर सकता हूं?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;/table&amp;gt;&lt;br /&gt;
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* &amp;lt;b&amp;gt;नोट्स बनाना और नोट्स बांटना :&amp;lt;/b&amp;gt; अपने दोस्तों के साथ अपने विचारों को लिखिए या बतायें, जो आपको लगता है कि परमेश्वर आपसे कह रहा है, आपके प्रश्न, आपके या आपके दोस्तों के प्रार्थना अनुरोध, कैसे परमेश्वर ने प्रार्थना का उत्तर दिया, छंद को प्रोत्साहित किया,…&lt;br /&gt;
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__NOTOC__&amp;lt;sidebar&amp;gt;sidebar-essentials&amp;lt;/sidebar&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
यदि हम किसी व्यक्ति को जानना चाहते हैं, तो हमें उनके साथ नियमित संपर्क करने की आवश्यकता है। परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में भी ऐसा ही है: उन्हें बेहतर तरीके से जानने के लिए, हमें उसके साथ समय बिताने की जरूरत है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के साथ हमारे समय का उद्देश्य ==&lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;परमेश्वर की पूजा करने के लिए&amp;lt;/b&amp;gt;: परमेश्वर हमारी प्रशंसा के योग्य है और हमारे समय के हकदार हैं।&lt;br /&gt;
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* &amp;lt;b&amp;gt;परमेश्वर से सीखने के लिए&amp;lt;/b&amp;gt;: परमेश्वर हमें अपने वचन, बाइबल और उसकी आत्मा के माध्यम से सिखाना चाहता है। यह हमारे लिए आध्यात्मिक भोजन की तरह है ताकि हम विकसित हो सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाइबल से उदाहरण ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|निम्नलिखित बाइबल छंदों को देखें और तालिका भरें: यह किस व्यक्ति के बारे में बात कर रहा है? कब, कहाँ और कैसे यह व्यक्ति परमेश्वर के साथ समय बिताता है?}}&lt;br /&gt;
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| दानिय्येल ६:११ || || || || &lt;br /&gt;
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== परमेश्वर के साथ हमारे समय के लिए उपकरण और सुझाव == &lt;br /&gt;
* &amp;lt;b&amp;gt;बाइबिल:&amp;lt;/b&amp;gt;बाइबिल से एक अंश पढ़ें और फिर उसके बारे में सोचें और प्रार्थना करें। आप इसके लिए सिर-दिल-हाथ के सवालों का उपयोग कर सकते हैं:&amp;lt;br/&amp;gt;&amp;lt;table&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Head-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;सिर:&amp;lt;/b&amp;gt; मैं यहां क्या सीखता हूं?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Heart-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;दिल:&amp;lt;/b&amp;gt; मेरे दिल को क्या छूता है?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;tr&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;[[File:Hands-32.png]]&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;td&amp;gt;&amp;lt;b&amp;gt;हाथ:&amp;lt;/b&amp;gt; मैं इसे कैसे लागू कर सकता हूं?&amp;lt;/td&amp;gt;&amp;lt;/tr&amp;gt;&amp;lt;/table&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के साथ मेरे समय के लिए मेरी प्रतिबद्धता ==&lt;br /&gt;
समय:&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
स्थान:&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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		<updated>2020-09-27T14:25:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;यदि हम किसी व्यक्ति को जानना चाहते हैं, तो हमें उनके साथ नियमित संपर्क करने की आवश्यकता है। परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में भी ऐसा ही है: उन्हें बेहतर तरीके से जानने के लिए, हमें उसके साथ समय बिताने की जरूरत है।&lt;/div&gt;</summary>
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		<title>Forgiving Step by Step/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.4training.net/index.php?title=Forgiving_Step_by_Step/hi&amp;diff=49808"/>
		<updated>2020-08-08T17:04:52Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__NOTOC__&amp;lt;sidebar&amp;gt;sidebar-essentials&amp;lt;/sidebar&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हम सभी गहरे और प्यार भरे रिश्तों के लिए तरसते हैं, लेकिन बदकिस्मती से हम सभी ने चोट अनुभव किया है और शायद दूसरों के द्वारा गाली भी खाई है| यह दर्दनाक है और हम इस दर्द  को सहते हैं। जिस तरह शारीरिक घाव संक्रमित और पकने लगते है, उसी तरह हमारे दिल में जो घाव है वह कड़वाहट में बदल सकते है, अगर हम उसपर कार्य न करे| सिर्फ समय सब कुछ सही नहीं कर सकता|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
इसके जवाब में हम अक्सर खुद को दूर कर लेते हैं और सुरक्षा के रूप में दीवारों का निर्माण कर लेते हैं। जिसके फल स्वरूप, हम किसी को भी हमारे करीब आने नहीं देते है और हम अलग हो जाते है| वैकल्पिक रूप से, हम गुस्से से प्रतिक्रिया करते है, दुसरो की गलतियों को पकड़कर और उससे बदला लेने की चाह रखते है| यह हमारे विचारों को उस चोट के साथ सेवन करने के लिए छोड़ देता है जो दूसरे व्यक्ति ने हमें दिया है।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
भविष्य में इन रणनीतियों का उपयोग करके, हम खुद को दुरुपयोग से बचाने की कोशिश करते है, लेकिन अंत में हम खुद को और भी अधिक चोट पहुंचाते हैं। इसके अलावा, अगर हम दुखी है तो हम दूसरों के साथ प्यार से व्यवहार नहीं करते| - &amp;lt;i&amp;gt;चोट खाए हुए लोग दूसरो को चोट पहुँचाते है &amp;lt;/i&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दुष्चक्र से पलायन केवल &amp;lt;i&amp;gt;क्षमा&amp;lt;/i&amp;gt; ही है, जो कि बहुत कठिन है अगर हमने अत्यधिक दर्द का अनुभव किया है। हालाँकि, जब तक हम क्षमा नहीं करते हैं तब तक हम उस व्यक्ति से बंधे रहते हैं जिसने हमें अतीत मे चोट पहुंचाई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम केवल दर्दनाक अनुभवों को नहीं भुला पा रहे है और केवल यादों को दबाने की कोशिश कर सकते है। लेकिन परमेश्वर चाहता है कि हम &amp;lt;i&amp;gt;मुक्त&amp;lt;/i&amp;gt; हों - कड़वाहट से मुक्त, बदला लेने की इच्छा से मुक्त, और अतीत के दर्द से मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा क्या है? ==&lt;br /&gt;
क्षमा किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ सभी तिरस्कार और आरोपों को जाने देना चुन रही है। मैंने उसे परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया। खुद निर्णय पारित करने के बजाय, मैं परमेश्वर पर भरोसा करता/करती हूं, वो ही न्यायधीश है, और उसे यह फैसला करने दें कि दूसरे व्यक्ति के साथ क्या होगा। इसका अर्थ यह भी है कि मैं अब दूसरे व्यक्ति के पापों को उसके खिलाफ नहीं गिनाऊंगा या उन्हें पकड़ कर रखूँगा| दूसरे शब्दों में, जैसा कि मैं पहले से ही जी रहा हूँ उसके पापों के परिणामों के साथ और अतीत को नहीं बदल सकता, मैं अब इसके साथ शांति बनाता हूं और दूसरे व्यक्ति को सभी ऋणों से मुक्त करता हूं।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह फैसला मेरे अकेले का है| यह दूसरे व्यक्ति से पूरी तरह से स्वतंत्र है, चाहे वह क्षमा माँगे या नहीं या वह उपस्थित रहे या नहीं| हम उस व्यक्ति पर निर्भर नहीं हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हालांकि क्षमा करना दूसरे व्यक्ति के लिए अच्छा है, पहले और सबसे पहले मैं इसे अपने अच्छे के लिए करता हूं| जब हम क्षमा करते हैं, तो हम भय, क्रोध, और कड़वाहट जैसी नकारात्मक भावनाओं से मुक्त हो जाते हैं और फिर चंगे हो कर पूरे हो जाते है|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा करने के कदम ==&lt;br /&gt;
कभी-कभी जब हम जल्दबाजी में माफी मांगते हैं तो छोटा रास्ता लेते हैं लेकिन बाद में एहसास होता है कि हमारे दिल में अभी भी दर्द के अवशेष है| तो हम दूसरों को पूरी तरह से कैसे माफ कर सकते हैं? निम्नलिखित कदम हमें क्षमा करने की प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने में मदद करते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|पहले तीन चरण हम सावधानी से देखेंगे, अधिमानतः एक सहायक के साथ।}}&lt;br /&gt;
=== 1. क्या हुआ? ===&lt;br /&gt;
* विशेष रूप से बताएं कि क्या हुआ था।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम सामान्य और अस्पष्ट रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 2. मुझे क्या तकलीफ हुई? मुझे कैसा लगा? ===&lt;br /&gt;
* भावनाएँ महत्वपूर्ण हैं और हम कौन हैं इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं और सिर्फ तथ्यों से चिपके रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 3. पाप का नाम बताइए| ===&lt;br /&gt;
*अनुपयुक्त चीजों को नरम न करें और उचित सिद्ध न करें। पहचाने की दूसरे व्यक्ति ने किन चीजों के माध्यम से मेरे खिलाफ पाप किया है, जो उसने किया या नहीं किया।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती :&amp;lt;/i&amp;gt; हम दूसरे व्यक्ति को सही ठहराते हैं (लेकिन अगर हम इससे पाप नहीं कहते हैं तो क्षमा की प्राप्ति नहीं हो सकती)।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|अब हम प्रार्थना में जाते हैं और सब कुछ परमेश्वर के पास ले आते हैं।}}&lt;br /&gt;
=== 4. परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ===&lt;br /&gt;
*हम परमेश्वर, जो न्यायाधीश है उनके पास जाते हैं और उस व्यक्ति के खिलाफ आरोप लाते हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है।&lt;br /&gt;
हम अपना दिल परमेश्वर को देते हैं और उन्हें पहले तीन कदमो के सभी मुख्य बिंदुओं को बताते हैं।&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं, या हम अपनी भावनाओं को परमेश्वर से छिपा लेते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 5. क्षमा घोषित करें ===&lt;br /&gt;
*अब हम क्षमा याचना करते हैं (&amp;quot;मैं ___ को  _____के लिए माफ करता हूं&amp;quot;) और पूरे मामले को परमेश्वर के हाथों में सौंपने का निर्णय लेता हूं|&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम परमेश्वर को बताते हैं कि उस व्यक्ति के साथ क्या करना है (हम दूसरे व्यक्ति को शाप देते हैं)| या हम कहते हैं कि हम क्षमा करना चाहते हैं (&amp;quot;परमेश्वर, मुझे क्षमा करने में मदद करें&amp;quot;) लेकिन वास्तव में निर्णय नहीं लेते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ==&lt;br /&gt;
परमेश्वर न्यायाधीश है और हमें हर अन्याय को उनके सामने लाने का अधिकार है| हम निश्चित हो सकते हैं कि वह न्याय लाएगा और सभी को न्याय देगा - यह हमारा काम नहीं है| हमें दूसरों को वापस भुगतान करने या उनसे बदला लेने का कोई अधिकार नहीं है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
जिस तरह हम इस दुनिया में एक न्यायाधीश के सामने आरोप लाते हैं, उसी तरह हम परमेश्वर के सामने आरोप ला सकते हैं। हमें उन्हे अप्रसन्न करने से डरना नहीं है, लेकिन हम पूरी तरह से ईमानदार हो कर, अपनी सभी भावनाओं को दिखा सकते हैं। समाप्त होने के बाद, हम अपने सारे आरोपों को छोड़ दे और सब कुछ परमेश्वर  के हाथों में सौंप देते है| अब हम स्वयं दूसरे व्यक्ति का न्याय करना जारी नहीं रखते, लेकिन हम निर्णय परमेश्वर पर छोड़ देते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अधिक संकेत ==&lt;br /&gt;
;सहायक के सहारे का उपयोग करें  &lt;br /&gt;
:कुछ पहलुओं की अनदेखी किए बिना अकेले क्षमा की इस पूरी प्रक्रिया से गुजरना कठिन है| किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करें जो आपके साथ इन चरणों से गुजर सके और आपके साथ प्रार्थना कर सके!&lt;br /&gt;
;हमारे अपने पाप&lt;br /&gt;
:जब हम चोटिल होते हैं, तो हम अक्सर अनजाने में दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं और उनके विरुद्ध पाप करते हैं| इन बातों को अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि पश्चाताप करना और क्षमा मांगना महत्वपूर्ण है| अपने मन में आने वाली किसी भी चीज़ को जितनी जल्दी हो सके स्पष्ट करें!&lt;br /&gt;
;अपने आप को क्षमा करना&lt;br /&gt;
:कभी-कभी हम खुद पर क्रोधित होते हैं या किसी चीज के लिए खुद को दोषी मानते हैं। परमेश्वर हमें क्षमा करने के लिए और शुद्ध करने के लिए यीशु मसीह का माध्यम प्रदान करते है। खुद को माफ़ करने का मतलब है कि उसके  प्रस्ताव को लेना और उसे खुद पर लागू करना।&lt;br /&gt;
;परमेश्वर को &amp;quot;क्षमा&amp;quot; करना &lt;br /&gt;
:कभी-कभी हम परमेश्वर के बारे में नकारात्मक विचार रखते हैं या उस पर क्रोधित रहते हैं| परमेश्वर गलतियाँ नहीं करता, इसलिए हम उन्हें माफ नहीं कर सकते। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी निराशाओं और उसके प्रति नकारात्मक भावनाओं को छोड़ दें|&lt;br /&gt;
;चुनाव करना हर बार माफ़ करने का  &lt;br /&gt;
:यदि पुरानी भावनाएँ फिर से सामने आती हैं, तो अपने आप को याद दिलाएँ कि आपने पहले ही माफ कर दिया है और वे भावनाएँ बीत जाएँगी। हालांकि, यह संभव है कि चोट के अन्य पहलू या गहरी परतें हों जिन्हें आपने पहली बार संबोधित नहीं किया था। फिर हम एक बार फिर से क्षमा करने की प्रक्रिया से गुज़र सकते हैं ताकि ये क्षेत्र ठीक हो जाएं|&lt;br /&gt;
== खुद को परखो ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|परमेश्वर से निम्नलिखित प्रशन पूछे और नोट्स बनाने के लिए 2 मिनट का समय लें-:}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;परमेश्वर, मुझे किसे माफ़ करने की आवश्यकता है?&#039;&#039;&#039;&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
परमेश्वर की सुनें और अपने रिश्तों का विश्लेषण करें  (माता-पिता, परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी, सहपाठी, शिक्षक, नेता, खुद, परमेश्वर, ...)&lt;br /&gt;
मुझे चोट कैसे लगी और किससे हुई?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;background-color: #f9f9f9; border: 1px solid black; padding:5px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह पता लगाने के लिए संकेत कि क्या उस व्यक्ति के साथ संबंध स्वस्थ है या अभी भी किसी तरह से टूटा हुआ है:&lt;br /&gt;
*उस व्यक्ति के बारे में सोचें-: क्या आप उसे दिल से शुभकामनाएं दे सकते हैं?&lt;br /&gt;
*कल्पना कीजिए कि आप सड़क पर उस व्यक्ति से मिलेंगे-: आपको कैसा लगेगा? क्या आप अभी भी मन में वैर-भाव रख रहे हो?&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अभ्यास ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|मुझे पहले कौन सी चोट को अभिभाषण करना है ?}}&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|इसमें मुझे किसका सहयोग मिलना चाहिए? विशेष रूप से स्पष्ट करें कि आप इसे कैसे जारी रखेंगे!}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{PdfDownload|कदम_दर_कदम_क्षमा_करना.pdf}}&lt;br /&gt;
{{OdtDownload|कदम_दर_कदम_क्षमा_करना.odt}}&lt;br /&gt;
{{Version|१.३}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.4training.net/index.php?title=Translations:Forgiving_Step_by_Step/44/hi&amp;diff=49807</id>
		<title>Translations:Forgiving Step by Step/44/hi</title>
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		<updated>2020-08-08T17:04:52Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;इसमें मुझे किसका सहयोग मिलना चाहिए? विशेष रूप से स्पष्ट करें कि आप इसे कैसे जारी रखेंगे!&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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		<title>Forgiving Step by Step/hi</title>
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		<updated>2020-08-08T16:53:34Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__NOTOC__&amp;lt;sidebar&amp;gt;sidebar-essentials&amp;lt;/sidebar&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हम सभी गहरे और प्यार भरे रिश्तों के लिए तरसते हैं, लेकिन बदकिस्मती से हम सभी ने चोट अनुभव किया है और शायद दूसरों के द्वारा गाली भी खाई है| यह दर्दनाक है और हम इस दर्द  को सहते हैं। जिस तरह शारीरिक घाव संक्रमित और पकने लगते है, उसी तरह हमारे दिल में जो घाव है वह कड़वाहट में बदल सकते है, अगर हम उसपर कार्य न करे| सिर्फ समय सब कुछ सही नहीं कर सकता|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
इसके जवाब में हम अक्सर खुद को दूर कर लेते हैं और सुरक्षा के रूप में दीवारों का निर्माण कर लेते हैं। जिसके फल स्वरूप, हम किसी को भी हमारे करीब आने नहीं देते है और हम अलग हो जाते है| वैकल्पिक रूप से, हम गुस्से से प्रतिक्रिया करते है, दुसरो की गलतियों को पकड़कर और उससे बदला लेने की चाह रखते है| यह हमारे विचारों को उस चोट के साथ सेवन करने के लिए छोड़ देता है जो दूसरे व्यक्ति ने हमें दिया है।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
भविष्य में इन रणनीतियों का उपयोग करके, हम खुद को दुरुपयोग से बचाने की कोशिश करते है, लेकिन अंत में हम खुद को और भी अधिक चोट पहुंचाते हैं। इसके अलावा, अगर हम दुखी है तो हम दूसरों के साथ प्यार से व्यवहार नहीं करते| - &amp;lt;i&amp;gt;चोट खाए हुए लोग दूसरो को चोट पहुँचाते है &amp;lt;/i&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दुष्चक्र से पलायन केवल &amp;lt;i&amp;gt;क्षमा&amp;lt;/i&amp;gt; ही है, जो कि बहुत कठिन है अगर हमने अत्यधिक दर्द का अनुभव किया है। हालाँकि, जब तक हम क्षमा नहीं करते हैं तब तक हम उस व्यक्ति से बंधे रहते हैं जिसने हमें अतीत मे चोट पहुंचाई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम केवल दर्दनाक अनुभवों को नहीं भुला पा रहे है और केवल यादों को दबाने की कोशिश कर सकते है। लेकिन परमेश्वर चाहता है कि हम &amp;lt;i&amp;gt;मुक्त&amp;lt;/i&amp;gt; हों - कड़वाहट से मुक्त, बदला लेने की इच्छा से मुक्त, और अतीत के दर्द से मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा क्या है? ==&lt;br /&gt;
क्षमा किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ सभी तिरस्कार और आरोपों को जाने देना चुन रही है। मैंने उसे परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया। खुद निर्णय पारित करने के बजाय, मैं परमेश्वर पर भरोसा करता/करती हूं, वो ही न्यायधीश है, और उसे यह फैसला करने दें कि दूसरे व्यक्ति के साथ क्या होगा। इसका अर्थ यह भी है कि मैं अब दूसरे व्यक्ति के पापों को उसके खिलाफ नहीं गिनाऊंगा या उन्हें पकड़ कर रखूँगा| दूसरे शब्दों में, जैसा कि मैं पहले से ही जी रहा हूँ उसके पापों के परिणामों के साथ और अतीत को नहीं बदल सकता, मैं अब इसके साथ शांति बनाता हूं और दूसरे व्यक्ति को सभी ऋणों से मुक्त करता हूं।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह फैसला मेरे अकेले का है| यह दूसरे व्यक्ति से पूरी तरह से स्वतंत्र है, चाहे वह क्षमा माँगे या नहीं या वह उपस्थित रहे या नहीं| हम उस व्यक्ति पर निर्भर नहीं हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हालांकि क्षमा करना दूसरे व्यक्ति के लिए अच्छा है, पहले और सबसे पहले मैं इसे अपने अच्छे के लिए करता हूं| जब हम क्षमा करते हैं, तो हम भय, क्रोध, और कड़वाहट जैसी नकारात्मक भावनाओं से मुक्त हो जाते हैं और फिर चंगे हो कर पूरे हो जाते है|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा करने के कदम ==&lt;br /&gt;
कभी-कभी जब हम जल्दबाजी में माफी मांगते हैं तो छोटा रास्ता लेते हैं लेकिन बाद में एहसास होता है कि हमारे दिल में अभी भी दर्द के अवशेष है| तो हम दूसरों को पूरी तरह से कैसे माफ कर सकते हैं? निम्नलिखित कदम हमें क्षमा करने की प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने में मदद करते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|पहले तीन चरण हम सावधानी से देखेंगे, अधिमानतः एक सहायक के साथ।}}&lt;br /&gt;
=== 1. क्या हुआ? ===&lt;br /&gt;
* विशेष रूप से बताएं कि क्या हुआ था।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम सामान्य और अस्पष्ट रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 2. मुझे क्या तकलीफ हुई? मुझे कैसा लगा? ===&lt;br /&gt;
* भावनाएँ महत्वपूर्ण हैं और हम कौन हैं इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं और सिर्फ तथ्यों से चिपके रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 3. पाप का नाम बताइए| ===&lt;br /&gt;
*अनुपयुक्त चीजों को नरम न करें और उचित सिद्ध न करें। पहचाने की दूसरे व्यक्ति ने किन चीजों के माध्यम से मेरे खिलाफ पाप किया है, जो उसने किया या नहीं किया।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती :&amp;lt;/i&amp;gt; हम दूसरे व्यक्ति को सही ठहराते हैं (लेकिन अगर हम इससे पाप नहीं कहते हैं तो क्षमा की प्राप्ति नहीं हो सकती)।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|अब हम प्रार्थना में जाते हैं और सब कुछ परमेश्वर के पास ले आते हैं।}}&lt;br /&gt;
=== 4. परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ===&lt;br /&gt;
*हम परमेश्वर, जो न्यायाधीश है उनके पास जाते हैं और उस व्यक्ति के खिलाफ आरोप लाते हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है।&lt;br /&gt;
हम अपना दिल परमेश्वर को देते हैं और उन्हें पहले तीन कदमो के सभी मुख्य बिंदुओं को बताते हैं।&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं, या हम अपनी भावनाओं को परमेश्वर से छिपा लेते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 5. क्षमा घोषित करें ===&lt;br /&gt;
*अब हम क्षमा याचना करते हैं (&amp;quot;मैं ___ को  _____के लिए माफ करता हूं&amp;quot;) और पूरे मामले को परमेश्वर के हाथों में सौंपने का निर्णय लेता हूं|&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम परमेश्वर को बताते हैं कि उस व्यक्ति के साथ क्या करना है (हम दूसरे व्यक्ति को शाप देते हैं)| या हम कहते हैं कि हम क्षमा करना चाहते हैं (&amp;quot;परमेश्वर, मुझे क्षमा करने में मदद करें&amp;quot;) लेकिन वास्तव में निर्णय नहीं लेते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ==&lt;br /&gt;
परमेश्वर न्यायाधीश है और हमें हर अन्याय को उनके सामने लाने का अधिकार है| हम निश्चित हो सकते हैं कि वह न्याय लाएगा और सभी को न्याय देगा - यह हमारा काम नहीं है| हमें दूसरों को वापस भुगतान करने या उनसे बदला लेने का कोई अधिकार नहीं है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
जिस तरह हम इस दुनिया में एक न्यायाधीश के सामने आरोप लाते हैं, उसी तरह हम परमेश्वर के सामने आरोप ला सकते हैं। हमें उन्हे अप्रसन्न करने से डरना नहीं है, लेकिन हम पूरी तरह से ईमानदार हो कर, अपनी सभी भावनाओं को दिखा सकते हैं। समाप्त होने के बाद, हम अपने सारे आरोपों को छोड़ दे और सब कुछ परमेश्वर  के हाथों में सौंप देते है| अब हम स्वयं दूसरे व्यक्ति का न्याय करना जारी नहीं रखते, लेकिन हम निर्णय परमेश्वर पर छोड़ देते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अधिक संकेत ==&lt;br /&gt;
;सहायक के सहारे का उपयोग करें  &lt;br /&gt;
:कुछ पहलुओं की अनदेखी किए बिना अकेले क्षमा की इस पूरी प्रक्रिया से गुजरना कठिन है| किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करें जो आपके साथ इन चरणों से गुजर सके और आपके साथ प्रार्थना कर सके!&lt;br /&gt;
;हमारे अपने पाप&lt;br /&gt;
:जब हम चोटिल होते हैं, तो हम अक्सर अनजाने में दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं और उनके विरुद्ध पाप करते हैं| इन बातों को अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि पश्चाताप करना और क्षमा मांगना महत्वपूर्ण है| अपने मन में आने वाली किसी भी चीज़ को जितनी जल्दी हो सके स्पष्ट करें!&lt;br /&gt;
;अपने आप को क्षमा करना&lt;br /&gt;
:कभी-कभी हम खुद पर क्रोधित होते हैं या किसी चीज के लिए खुद को दोषी मानते हैं। परमेश्वर हमें क्षमा करने के लिए और शुद्ध करने के लिए यीशु मसीह का माध्यम प्रदान करते है। खुद को माफ़ करने का मतलब है कि उसके  प्रस्ताव को लेना और उसे खुद पर लागू करना।&lt;br /&gt;
;परमेश्वर को &amp;quot;क्षमा&amp;quot; करना &lt;br /&gt;
:कभी-कभी हम परमेश्वर के बारे में नकारात्मक विचार रखते हैं या उस पर क्रोधित रहते हैं| परमेश्वर गलतियाँ नहीं करता, इसलिए हम उन्हें माफ नहीं कर सकते। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी निराशाओं और उसके प्रति नकारात्मक भावनाओं को छोड़ दें|&lt;br /&gt;
;चुनाव करना हर बार माफ़ करने का  &lt;br /&gt;
:यदि पुरानी भावनाएँ फिर से सामने आती हैं, तो अपने आप को याद दिलाएँ कि आपने पहले ही माफ कर दिया है और वे भावनाएँ बीत जाएँगी। हालांकि, यह संभव है कि चोट के अन्य पहलू या गहरी परतें हों जिन्हें आपने पहली बार संबोधित नहीं किया था। फिर हम एक बार फिर से क्षमा करने की प्रक्रिया से गुज़र सकते हैं ताकि ये क्षेत्र ठीक हो जाएं|&lt;br /&gt;
== खुद को परखो ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|परमेश्वर से निम्नलिखित प्रशन पूछे और नोट्स बनाने के लिए 2 मिनट का समय लें-:}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;परमेश्वर, मुझे किसे माफ़ करने की आवश्यकता है?&#039;&#039;&#039;&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
परमेश्वर की सुनें और अपने रिश्तों का विश्लेषण करें  (माता-पिता, परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी, सहपाठी, शिक्षक, नेता, खुद, परमेश्वर, ...)&lt;br /&gt;
मुझे चोट कैसे लगी और किससे हुई?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;background-color: #f9f9f9; border: 1px solid black; padding:5px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह पता लगाने के लिए संकेत कि क्या उस व्यक्ति के साथ संबंध स्वस्थ है या अभी भी किसी तरह से टूटा हुआ है:&lt;br /&gt;
*उस व्यक्ति के बारे में सोचें-: क्या आप उसे दिल से शुभकामनाएं दे सकते हैं?&lt;br /&gt;
*कल्पना कीजिए कि आप सड़क पर उस व्यक्ति से मिलेंगे-: आपको कैसा लगेगा? क्या आप अभी भी मन में वैर-भाव रख रहे हो?&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अभ्यास ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|मुझे पहले कौन सी चोट को अभिभाषण करना है ?}}&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|इसमें मुझे कौन सहयोग/समर्थन करेगा ? विशेष रूप से स्पष्ट करें कि आप इसे कैसे जारी रखेंगे!}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{PdfDownload|कदम_दर_कदम_क्षमा_करना.pdf}}&lt;br /&gt;
{{OdtDownload|कदम_दर_कदम_क्षमा_करना.odt}}&lt;br /&gt;
{{Version|१.३}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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		<id>https://www.4training.net/index.php?title=Translations:Forgiving_Step_by_Step/36/hi&amp;diff=49805</id>
		<title>Translations:Forgiving Step by Step/36/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.4training.net/index.php?title=Translations:Forgiving_Step_by_Step/36/hi&amp;diff=49805"/>
		<updated>2020-08-08T16:53:34Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;यह पता लगाने के लिए संकेत कि क्या उस व्यक्ति के साथ संबंध स्वस्थ है या अभी भी किसी तरह से टूटा हुआ है:&lt;br /&gt;
*उस व्यक्ति के बारे में सोचें-: क्या आप उसे दिल से शुभकामनाएं दे सकते हैं?&lt;br /&gt;
*कल्पना कीजिए कि आप सड़क पर उस व्यक्ति से मिलेंगे-: आपको कैसा लगेगा? क्या आप अभी भी मन में वैर-भाव रख रहे हो?&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.4training.net/index.php?title=Forgiving_Step_by_Step/hi&amp;diff=49804</id>
		<title>Forgiving Step by Step/hi</title>
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		<updated>2020-08-08T16:49:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__NOTOC__&amp;lt;sidebar&amp;gt;sidebar-essentials&amp;lt;/sidebar&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हम सभी गहरे और प्यार भरे रिश्तों के लिए तरसते हैं, लेकिन बदकिस्मती से हम सभी ने चोट अनुभव किया है और शायद दूसरों के द्वारा गाली भी खाई है| यह दर्दनाक है और हम इस दर्द  को सहते हैं। जिस तरह शारीरिक घाव संक्रमित और पकने लगते है, उसी तरह हमारे दिल में जो घाव है वह कड़वाहट में बदल सकते है, अगर हम उसपर कार्य न करे| सिर्फ समय सब कुछ सही नहीं कर सकता|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
इसके जवाब में हम अक्सर खुद को दूर कर लेते हैं और सुरक्षा के रूप में दीवारों का निर्माण कर लेते हैं। जिसके फल स्वरूप, हम किसी को भी हमारे करीब आने नहीं देते है और हम अलग हो जाते है| वैकल्पिक रूप से, हम गुस्से से प्रतिक्रिया करते है, दुसरो की गलतियों को पकड़कर और उससे बदला लेने की चाह रखते है| यह हमारे विचारों को उस चोट के साथ सेवन करने के लिए छोड़ देता है जो दूसरे व्यक्ति ने हमें दिया है।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
भविष्य में इन रणनीतियों का उपयोग करके, हम खुद को दुरुपयोग से बचाने की कोशिश करते है, लेकिन अंत में हम खुद को और भी अधिक चोट पहुंचाते हैं। इसके अलावा, अगर हम दुखी है तो हम दूसरों के साथ प्यार से व्यवहार नहीं करते| - &amp;lt;i&amp;gt;चोट खाए हुए लोग दूसरो को चोट पहुँचाते है &amp;lt;/i&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दुष्चक्र से पलायन केवल &amp;lt;i&amp;gt;क्षमा&amp;lt;/i&amp;gt; ही है, जो कि बहुत कठिन है अगर हमने अत्यधिक दर्द का अनुभव किया है। हालाँकि, जब तक हम क्षमा नहीं करते हैं तब तक हम उस व्यक्ति से बंधे रहते हैं जिसने हमें अतीत मे चोट पहुंचाई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम केवल दर्दनाक अनुभवों को नहीं भुला पा रहे है और केवल यादों को दबाने की कोशिश कर सकते है। लेकिन परमेश्वर चाहता है कि हम &amp;lt;i&amp;gt;मुक्त&amp;lt;/i&amp;gt; हों - कड़वाहट से मुक्त, बदला लेने की इच्छा से मुक्त, और अतीत के दर्द से मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा क्या है? ==&lt;br /&gt;
क्षमा किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ सभी तिरस्कार और आरोपों को जाने देना चुन रही है। मैंने उसे परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया। खुद निर्णय पारित करने के बजाय, मैं परमेश्वर पर भरोसा करता/करती हूं, वो ही न्यायधीश है, और उसे यह फैसला करने दें कि दूसरे व्यक्ति के साथ क्या होगा। इसका अर्थ यह भी है कि मैं अब दूसरे व्यक्ति के पापों को उसके खिलाफ नहीं गिनाऊंगा या उन्हें पकड़ कर रखूँगा| दूसरे शब्दों में, जैसा कि मैं पहले से ही जी रहा हूँ उसके पापों के परिणामों के साथ और अतीत को नहीं बदल सकता, मैं अब इसके साथ शांति बनाता हूं और दूसरे व्यक्ति को सभी ऋणों से मुक्त करता हूं।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह फैसला मेरे अकेले का है| यह दूसरे व्यक्ति से पूरी तरह से स्वतंत्र है, चाहे वह क्षमा माँगे या नहीं या वह उपस्थित रहे या नहीं| हम उस व्यक्ति पर निर्भर नहीं हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हालांकि क्षमा करना दूसरे व्यक्ति के लिए अच्छा है, पहले और सबसे पहले मैं इसे अपने अच्छे के लिए करता हूं| जब हम क्षमा करते हैं, तो हम भय, क्रोध, और कड़वाहट जैसी नकारात्मक भावनाओं से मुक्त हो जाते हैं और फिर चंगे हो कर पूरे हो जाते है|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा करने के कदम ==&lt;br /&gt;
कभी-कभी जब हम जल्दबाजी में माफी मांगते हैं तो छोटा रास्ता लेते हैं लेकिन बाद में एहसास होता है कि हमारे दिल में अभी भी दर्द के अवशेष है| तो हम दूसरों को पूरी तरह से कैसे माफ कर सकते हैं? निम्नलिखित कदम हमें क्षमा करने की प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने में मदद करते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|पहले तीन चरण हम सावधानी से देखेंगे, अधिमानतः एक सहायक के साथ।}}&lt;br /&gt;
=== 1. क्या हुआ? ===&lt;br /&gt;
* विशेष रूप से बताएं कि क्या हुआ था।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम सामान्य और अस्पष्ट रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 2. मुझे क्या तकलीफ हुई? मुझे कैसा लगा? ===&lt;br /&gt;
* भावनाएँ महत्वपूर्ण हैं और हम कौन हैं इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं और सिर्फ तथ्यों से चिपके रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 3. पाप का नाम बताइए| ===&lt;br /&gt;
*अनुपयुक्त चीजों को नरम न करें और उचित सिद्ध न करें। पहचाने की दूसरे व्यक्ति ने किन चीजों के माध्यम से मेरे खिलाफ पाप किया है, जो उसने किया या नहीं किया।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती :&amp;lt;/i&amp;gt; हम दूसरे व्यक्ति को सही ठहराते हैं (लेकिन अगर हम इससे पाप नहीं कहते हैं तो क्षमा की प्राप्ति नहीं हो सकती)।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|अब हम प्रार्थना में जाते हैं और सब कुछ परमेश्वर के पास ले आते हैं।}}&lt;br /&gt;
=== 4. परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ===&lt;br /&gt;
*हम परमेश्वर, जो न्यायाधीश है उनके पास जाते हैं और उस व्यक्ति के खिलाफ आरोप लाते हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है।&lt;br /&gt;
हम अपना दिल परमेश्वर को देते हैं और उन्हें पहले तीन कदमो के सभी मुख्य बिंदुओं को बताते हैं।&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं, या हम अपनी भावनाओं को परमेश्वर से छिपा लेते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 5. क्षमा घोषित करें ===&lt;br /&gt;
*अब हम क्षमा याचना करते हैं (&amp;quot;मैं ___ को  _____के लिए माफ करता हूं&amp;quot;) और पूरे मामले को परमेश्वर के हाथों में सौंपने का निर्णय लेता हूं|&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम परमेश्वर को बताते हैं कि उस व्यक्ति के साथ क्या करना है (हम दूसरे व्यक्ति को शाप देते हैं)| या हम कहते हैं कि हम क्षमा करना चाहते हैं (&amp;quot;परमेश्वर, मुझे क्षमा करने में मदद करें&amp;quot;) लेकिन वास्तव में निर्णय नहीं लेते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ==&lt;br /&gt;
परमेश्वर न्यायाधीश है और हमें हर अन्याय को उनके सामने लाने का अधिकार है| हम निश्चित हो सकते हैं कि वह न्याय लाएगा और सभी को न्याय देगा - यह हमारा काम नहीं है| हमें दूसरों को वापस भुगतान करने या उनसे बदला लेने का कोई अधिकार नहीं है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
जिस तरह हम इस दुनिया में एक न्यायाधीश के सामने आरोप लाते हैं, उसी तरह हम परमेश्वर के सामने आरोप ला सकते हैं। हमें उन्हे अप्रसन्न करने से डरना नहीं है, लेकिन हम पूरी तरह से ईमानदार हो कर, अपनी सभी भावनाओं को दिखा सकते हैं। समाप्त होने के बाद, हम अपने सारे आरोपों को छोड़ दे और सब कुछ परमेश्वर  के हाथों में सौंप देते है| अब हम स्वयं दूसरे व्यक्ति का न्याय करना जारी नहीं रखते, लेकिन हम निर्णय परमेश्वर पर छोड़ देते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अधिक संकेत ==&lt;br /&gt;
;सहायक के सहारे का उपयोग करें  &lt;br /&gt;
:कुछ पहलुओं की अनदेखी किए बिना अकेले क्षमा की इस पूरी प्रक्रिया से गुजरना कठिन है| किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करें जो आपके साथ इन चरणों से गुजर सके और आपके साथ प्रार्थना कर सके!&lt;br /&gt;
;हमारे अपने पाप&lt;br /&gt;
:जब हम चोटिल होते हैं, तो हम अक्सर अनजाने में दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं और उनके विरुद्ध पाप करते हैं| इन बातों को अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि पश्चाताप करना और क्षमा मांगना महत्वपूर्ण है| अपने मन में आने वाली किसी भी चीज़ को जितनी जल्दी हो सके स्पष्ट करें!&lt;br /&gt;
;अपने आप को क्षमा करना&lt;br /&gt;
:कभी-कभी हम खुद पर क्रोधित होते हैं या किसी चीज के लिए खुद को दोषी मानते हैं। परमेश्वर हमें क्षमा करने के लिए और शुद्ध करने के लिए यीशु मसीह का माध्यम प्रदान करते है। खुद को माफ़ करने का मतलब है कि उसके  प्रस्ताव को लेना और उसे खुद पर लागू करना।&lt;br /&gt;
;परमेश्वर को &amp;quot;क्षमा&amp;quot; करना &lt;br /&gt;
:कभी-कभी हम परमेश्वर के बारे में नकारात्मक विचार रखते हैं या उस पर क्रोधित रहते हैं| परमेश्वर गलतियाँ नहीं करता, इसलिए हम उन्हें माफ नहीं कर सकते। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी निराशाओं और उसके प्रति नकारात्मक भावनाओं को छोड़ दें|&lt;br /&gt;
;चुनाव करना हर बार माफ़ करने का  &lt;br /&gt;
:यदि पुरानी भावनाएँ फिर से सामने आती हैं, तो अपने आप को याद दिलाएँ कि आपने पहले ही माफ कर दिया है और वे भावनाएँ बीत जाएँगी। हालांकि, यह संभव है कि चोट के अन्य पहलू या गहरी परतें हों जिन्हें आपने पहली बार संबोधित नहीं किया था। फिर हम एक बार फिर से क्षमा करने की प्रक्रिया से गुज़र सकते हैं ताकि ये क्षेत्र ठीक हो जाएं|&lt;br /&gt;
== खुद को परखो ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|परमेश्वर से निम्नलिखित प्रशन पूछे और नोट्स बनाने के लिए 2 मिनट का समय लें-:}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;परमेश्वर, मुझे किसे माफ़ करने की आवश्यकता है?&#039;&#039;&#039;&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
परमेश्वर की सुनें और अपने रिश्तों का विश्लेषण करें  (माता-पिता, परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी, सहपाठी, शिक्षक, नेता, खुद, परमेश्वर, ...)&lt;br /&gt;
मुझे चोट कैसे लगी और किससे हुई?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;background-color: #f9f9f9; border: 1px solid black; padding:5px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह पता लगाने के लिए संकेत कि क्या किसी व्यक्ति के साथ संबंध स्वस्थ है या अभी भी किसी तरह से टूटा हुआ है:&lt;br /&gt;
*उस व्यक्ति के बारे में सोचें: क्या आप उसे दिल से शुभकामनाएं दे सकते हैं?&lt;br /&gt;
*कल्पना कीजिए कि आप सड़क पर उस व्यक्ति से मिलेंगे: तो आपको कैसा लगेगा? क्या आप अभी भी मन में वैर-भाव रख रहे हो?&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अभ्यास ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|मुझे पहले कौन सी चोट को अभिभाषण करना है ?}}&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|इसमें मुझे कौन सहयोग/समर्थन करेगा ? विशेष रूप से स्पष्ट करें कि आप इसे कैसे जारी रखेंगे!}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{PdfDownload|कदम_दर_कदम_क्षमा_करना.pdf}}&lt;br /&gt;
{{OdtDownload|कदम_दर_कदम_क्षमा_करना.odt}}&lt;br /&gt;
{{Version|१.३}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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		<id>https://www.4training.net/index.php?title=Translations:Forgiving_Step_by_Step/35/hi&amp;diff=49803</id>
		<title>Translations:Forgiving Step by Step/35/hi</title>
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		<updated>2020-08-08T16:49:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;परमेश्वर की सुनें और अपने रिश्तों का विश्लेषण करें  (माता-पिता, परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी, सहपाठी, शिक्षक, नेता, खुद, परमेश्वर, ...)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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		<title>Forgiving Step by Step/hi</title>
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		<updated>2020-08-08T16:46:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__NOTOC__&amp;lt;sidebar&amp;gt;sidebar-essentials&amp;lt;/sidebar&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हम सभी गहरे और प्यार भरे रिश्तों के लिए तरसते हैं, लेकिन बदकिस्मती से हम सभी ने चोट अनुभव किया है और शायद दूसरों के द्वारा गाली भी खाई है| यह दर्दनाक है और हम इस दर्द  को सहते हैं। जिस तरह शारीरिक घाव संक्रमित और पकने लगते है, उसी तरह हमारे दिल में जो घाव है वह कड़वाहट में बदल सकते है, अगर हम उसपर कार्य न करे| सिर्फ समय सब कुछ सही नहीं कर सकता|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
इसके जवाब में हम अक्सर खुद को दूर कर लेते हैं और सुरक्षा के रूप में दीवारों का निर्माण कर लेते हैं। जिसके फल स्वरूप, हम किसी को भी हमारे करीब आने नहीं देते है और हम अलग हो जाते है| वैकल्पिक रूप से, हम गुस्से से प्रतिक्रिया करते है, दुसरो की गलतियों को पकड़कर और उससे बदला लेने की चाह रखते है| यह हमारे विचारों को उस चोट के साथ सेवन करने के लिए छोड़ देता है जो दूसरे व्यक्ति ने हमें दिया है।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
भविष्य में इन रणनीतियों का उपयोग करके, हम खुद को दुरुपयोग से बचाने की कोशिश करते है, लेकिन अंत में हम खुद को और भी अधिक चोट पहुंचाते हैं। इसके अलावा, अगर हम दुखी है तो हम दूसरों के साथ प्यार से व्यवहार नहीं करते| - &amp;lt;i&amp;gt;चोट खाए हुए लोग दूसरो को चोट पहुँचाते है &amp;lt;/i&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दुष्चक्र से पलायन केवल &amp;lt;i&amp;gt;क्षमा&amp;lt;/i&amp;gt; ही है, जो कि बहुत कठिन है अगर हमने अत्यधिक दर्द का अनुभव किया है। हालाँकि, जब तक हम क्षमा नहीं करते हैं तब तक हम उस व्यक्ति से बंधे रहते हैं जिसने हमें अतीत मे चोट पहुंचाई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम केवल दर्दनाक अनुभवों को नहीं भुला पा रहे है और केवल यादों को दबाने की कोशिश कर सकते है। लेकिन परमेश्वर चाहता है कि हम &amp;lt;i&amp;gt;मुक्त&amp;lt;/i&amp;gt; हों - कड़वाहट से मुक्त, बदला लेने की इच्छा से मुक्त, और अतीत के दर्द से मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा क्या है? ==&lt;br /&gt;
क्षमा किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ सभी तिरस्कार और आरोपों को जाने देना चुन रही है। मैंने उसे परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया। खुद निर्णय पारित करने के बजाय, मैं परमेश्वर पर भरोसा करता/करती हूं, वो ही न्यायधीश है, और उसे यह फैसला करने दें कि दूसरे व्यक्ति के साथ क्या होगा। इसका अर्थ यह भी है कि मैं अब दूसरे व्यक्ति के पापों को उसके खिलाफ नहीं गिनाऊंगा या उन्हें पकड़ कर रखूँगा| दूसरे शब्दों में, जैसा कि मैं पहले से ही जी रहा हूँ उसके पापों के परिणामों के साथ और अतीत को नहीं बदल सकता, मैं अब इसके साथ शांति बनाता हूं और दूसरे व्यक्ति को सभी ऋणों से मुक्त करता हूं।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह फैसला मेरे अकेले का है| यह दूसरे व्यक्ति से पूरी तरह से स्वतंत्र है, चाहे वह क्षमा माँगे या नहीं या वह उपस्थित रहे या नहीं| हम उस व्यक्ति पर निर्भर नहीं हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हालांकि क्षमा करना दूसरे व्यक्ति के लिए अच्छा है, पहले और सबसे पहले मैं इसे अपने अच्छे के लिए करता हूं| जब हम क्षमा करते हैं, तो हम भय, क्रोध, और कड़वाहट जैसी नकारात्मक भावनाओं से मुक्त हो जाते हैं और फिर चंगे हो कर पूरे हो जाते है|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा करने के कदम ==&lt;br /&gt;
कभी-कभी जब हम जल्दबाजी में माफी मांगते हैं तो छोटा रास्ता लेते हैं लेकिन बाद में एहसास होता है कि हमारे दिल में अभी भी दर्द के अवशेष है| तो हम दूसरों को पूरी तरह से कैसे माफ कर सकते हैं? निम्नलिखित कदम हमें क्षमा करने की प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने में मदद करते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|पहले तीन चरण हम सावधानी से देखेंगे, अधिमानतः एक सहायक के साथ।}}&lt;br /&gt;
=== 1. क्या हुआ? ===&lt;br /&gt;
* विशेष रूप से बताएं कि क्या हुआ था।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम सामान्य और अस्पष्ट रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 2. मुझे क्या तकलीफ हुई? मुझे कैसा लगा? ===&lt;br /&gt;
* भावनाएँ महत्वपूर्ण हैं और हम कौन हैं इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं और सिर्फ तथ्यों से चिपके रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 3. पाप का नाम बताइए| ===&lt;br /&gt;
*अनुपयुक्त चीजों को नरम न करें और उचित सिद्ध न करें। पहचाने की दूसरे व्यक्ति ने किन चीजों के माध्यम से मेरे खिलाफ पाप किया है, जो उसने किया या नहीं किया।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती :&amp;lt;/i&amp;gt; हम दूसरे व्यक्ति को सही ठहराते हैं (लेकिन अगर हम इससे पाप नहीं कहते हैं तो क्षमा की प्राप्ति नहीं हो सकती)।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|अब हम प्रार्थना में जाते हैं और सब कुछ परमेश्वर के पास ले आते हैं।}}&lt;br /&gt;
=== 4. परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ===&lt;br /&gt;
*हम परमेश्वर, जो न्यायाधीश है उनके पास जाते हैं और उस व्यक्ति के खिलाफ आरोप लाते हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है।&lt;br /&gt;
हम अपना दिल परमेश्वर को देते हैं और उन्हें पहले तीन कदमो के सभी मुख्य बिंदुओं को बताते हैं।&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं, या हम अपनी भावनाओं को परमेश्वर से छिपा लेते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 5. क्षमा घोषित करें ===&lt;br /&gt;
*अब हम क्षमा याचना करते हैं (&amp;quot;मैं ___ को  _____के लिए माफ करता हूं&amp;quot;) और पूरे मामले को परमेश्वर के हाथों में सौंपने का निर्णय लेता हूं|&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम परमेश्वर को बताते हैं कि उस व्यक्ति के साथ क्या करना है (हम दूसरे व्यक्ति को शाप देते हैं)| या हम कहते हैं कि हम क्षमा करना चाहते हैं (&amp;quot;परमेश्वर, मुझे क्षमा करने में मदद करें&amp;quot;) लेकिन वास्तव में निर्णय नहीं लेते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ==&lt;br /&gt;
परमेश्वर न्यायाधीश है और हमें हर अन्याय को उनके सामने लाने का अधिकार है| हम निश्चित हो सकते हैं कि वह न्याय लाएगा और सभी को न्याय देगा - यह हमारा काम नहीं है| हमें दूसरों को वापस भुगतान करने या उनसे बदला लेने का कोई अधिकार नहीं है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
जिस तरह हम इस दुनिया में एक न्यायाधीश के सामने आरोप लाते हैं, उसी तरह हम परमेश्वर के सामने आरोप ला सकते हैं। हमें उन्हे अप्रसन्न करने से डरना नहीं है, लेकिन हम पूरी तरह से ईमानदार हो कर, अपनी सभी भावनाओं को दिखा सकते हैं। समाप्त होने के बाद, हम अपने सारे आरोपों को छोड़ दे और सब कुछ परमेश्वर  के हाथों में सौंप देते है| अब हम स्वयं दूसरे व्यक्ति का न्याय करना जारी नहीं रखते, लेकिन हम निर्णय परमेश्वर पर छोड़ देते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अधिक संकेत ==&lt;br /&gt;
;सहायक के सहारे का उपयोग करें  &lt;br /&gt;
:कुछ पहलुओं की अनदेखी किए बिना अकेले क्षमा की इस पूरी प्रक्रिया से गुजरना कठिन है| किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करें जो आपके साथ इन चरणों से गुजर सके और आपके साथ प्रार्थना कर सके!&lt;br /&gt;
;हमारे अपने पाप&lt;br /&gt;
:जब हम चोटिल होते हैं, तो हम अक्सर अनजाने में दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं और उनके विरुद्ध पाप करते हैं| इन बातों को अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि पश्चाताप करना और क्षमा मांगना महत्वपूर्ण है| अपने मन में आने वाली किसी भी चीज़ को जितनी जल्दी हो सके स्पष्ट करें!&lt;br /&gt;
;अपने आप को क्षमा करना&lt;br /&gt;
:कभी-कभी हम खुद पर क्रोधित होते हैं या किसी चीज के लिए खुद को दोषी मानते हैं। परमेश्वर हमें क्षमा करने के लिए और शुद्ध करने के लिए यीशु मसीह का माध्यम प्रदान करते है। खुद को माफ़ करने का मतलब है कि उसके  प्रस्ताव को लेना और उसे खुद पर लागू करना।&lt;br /&gt;
;परमेश्वर को &amp;quot;क्षमा&amp;quot; करना &lt;br /&gt;
:कभी-कभी हम परमेश्वर के बारे में नकारात्मक विचार रखते हैं या उस पर क्रोधित रहते हैं| परमेश्वर गलतियाँ नहीं करता, इसलिए हम उन्हें माफ नहीं कर सकते। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी निराशाओं और उसके प्रति नकारात्मक भावनाओं को छोड़ दें|&lt;br /&gt;
;चुनाव करना हर बार माफ़ करने का  &lt;br /&gt;
:यदि पुरानी भावनाएँ फिर से सामने आती हैं, तो अपने आप को याद दिलाएँ कि आपने पहले ही माफ कर दिया है और वे भावनाएँ बीत जाएँगी। हालांकि, यह संभव है कि चोट के अन्य पहलू या गहरी परतें हों जिन्हें आपने पहली बार संबोधित नहीं किया था। फिर हम एक बार फिर से क्षमा करने की प्रक्रिया से गुज़र सकते हैं ताकि ये क्षेत्र ठीक हो जाएं|&lt;br /&gt;
== खुद को परखो ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|परमेश्वर से निम्नलिखित प्रशन पूछे और नोट्स बनाने के लिए 2 मिनट का समय लें-:}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;परमेश्वर, मुझे किसे माफ़ करने की आवश्यकता है?&#039;&#039;&#039;&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
परमेश्वर की सुनें और अपने रिश्तों को ग़ौर से देखो (माता-पिता, परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी, सहपाठी, शिक्षक, नेता, खुद, परमेश्वर, ...)&lt;br /&gt;
मुझे चोट कैसे लगी और किससे हुई?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;background-color: #f9f9f9; border: 1px solid black; padding:5px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह पता लगाने के लिए संकेत कि क्या किसी व्यक्ति के साथ संबंध स्वस्थ है या अभी भी किसी तरह से टूटा हुआ है:&lt;br /&gt;
*उस व्यक्ति के बारे में सोचें: क्या आप उसे दिल से शुभकामनाएं दे सकते हैं?&lt;br /&gt;
*कल्पना कीजिए कि आप सड़क पर उस व्यक्ति से मिलेंगे: तो आपको कैसा लगेगा? क्या आप अभी भी मन में वैर-भाव रख रहे हो?&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अभ्यास ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|मुझे पहले कौन सी चोट को अभिभाषण करना है ?}}&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|इसमें मुझे कौन सहयोग/समर्थन करेगा ? विशेष रूप से स्पष्ट करें कि आप इसे कैसे जारी रखेंगे!}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{PdfDownload|कदम_दर_कदम_क्षमा_करना.pdf}}&lt;br /&gt;
{{OdtDownload|कदम_दर_कदम_क्षमा_करना.odt}}&lt;br /&gt;
{{Version|१.३}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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		<title>Translations:Forgiving Step by Step/33/hi</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;परमेश्वर से निम्नलिखित प्रशन पूछे और नोट्स बनाने के लिए 2 मिनट का समय लें-:&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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		<id>https://www.4training.net/index.php?title=Forgiving_Step_by_Step/hi&amp;diff=49800</id>
		<title>Forgiving Step by Step/hi</title>
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		<updated>2020-08-08T16:45:44Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__NOTOC__&amp;lt;sidebar&amp;gt;sidebar-essentials&amp;lt;/sidebar&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हम सभी गहरे और प्यार भरे रिश्तों के लिए तरसते हैं, लेकिन बदकिस्मती से हम सभी ने चोट अनुभव किया है और शायद दूसरों के द्वारा गाली भी खाई है| यह दर्दनाक है और हम इस दर्द  को सहते हैं। जिस तरह शारीरिक घाव संक्रमित और पकने लगते है, उसी तरह हमारे दिल में जो घाव है वह कड़वाहट में बदल सकते है, अगर हम उसपर कार्य न करे| सिर्फ समय सब कुछ सही नहीं कर सकता|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
इसके जवाब में हम अक्सर खुद को दूर कर लेते हैं और सुरक्षा के रूप में दीवारों का निर्माण कर लेते हैं। जिसके फल स्वरूप, हम किसी को भी हमारे करीब आने नहीं देते है और हम अलग हो जाते है| वैकल्पिक रूप से, हम गुस्से से प्रतिक्रिया करते है, दुसरो की गलतियों को पकड़कर और उससे बदला लेने की चाह रखते है| यह हमारे विचारों को उस चोट के साथ सेवन करने के लिए छोड़ देता है जो दूसरे व्यक्ति ने हमें दिया है।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
भविष्य में इन रणनीतियों का उपयोग करके, हम खुद को दुरुपयोग से बचाने की कोशिश करते है, लेकिन अंत में हम खुद को और भी अधिक चोट पहुंचाते हैं। इसके अलावा, अगर हम दुखी है तो हम दूसरों के साथ प्यार से व्यवहार नहीं करते| - &amp;lt;i&amp;gt;चोट खाए हुए लोग दूसरो को चोट पहुँचाते है &amp;lt;/i&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दुष्चक्र से पलायन केवल &amp;lt;i&amp;gt;क्षमा&amp;lt;/i&amp;gt; ही है, जो कि बहुत कठिन है अगर हमने अत्यधिक दर्द का अनुभव किया है। हालाँकि, जब तक हम क्षमा नहीं करते हैं तब तक हम उस व्यक्ति से बंधे रहते हैं जिसने हमें अतीत मे चोट पहुंचाई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम केवल दर्दनाक अनुभवों को नहीं भुला पा रहे है और केवल यादों को दबाने की कोशिश कर सकते है। लेकिन परमेश्वर चाहता है कि हम &amp;lt;i&amp;gt;मुक्त&amp;lt;/i&amp;gt; हों - कड़वाहट से मुक्त, बदला लेने की इच्छा से मुक्त, और अतीत के दर्द से मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा क्या है? ==&lt;br /&gt;
क्षमा किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ सभी तिरस्कार और आरोपों को जाने देना चुन रही है। मैंने उसे परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया। खुद निर्णय पारित करने के बजाय, मैं परमेश्वर पर भरोसा करता/करती हूं, वो ही न्यायधीश है, और उसे यह फैसला करने दें कि दूसरे व्यक्ति के साथ क्या होगा। इसका अर्थ यह भी है कि मैं अब दूसरे व्यक्ति के पापों को उसके खिलाफ नहीं गिनाऊंगा या उन्हें पकड़ कर रखूँगा| दूसरे शब्दों में, जैसा कि मैं पहले से ही जी रहा हूँ उसके पापों के परिणामों के साथ और अतीत को नहीं बदल सकता, मैं अब इसके साथ शांति बनाता हूं और दूसरे व्यक्ति को सभी ऋणों से मुक्त करता हूं।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह फैसला मेरे अकेले का है| यह दूसरे व्यक्ति से पूरी तरह से स्वतंत्र है, चाहे वह क्षमा माँगे या नहीं या वह उपस्थित रहे या नहीं| हम उस व्यक्ति पर निर्भर नहीं हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हालांकि क्षमा करना दूसरे व्यक्ति के लिए अच्छा है, पहले और सबसे पहले मैं इसे अपने अच्छे के लिए करता हूं| जब हम क्षमा करते हैं, तो हम भय, क्रोध, और कड़वाहट जैसी नकारात्मक भावनाओं से मुक्त हो जाते हैं और फिर चंगे हो कर पूरे हो जाते है|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा करने के कदम ==&lt;br /&gt;
कभी-कभी जब हम जल्दबाजी में माफी मांगते हैं तो छोटा रास्ता लेते हैं लेकिन बाद में एहसास होता है कि हमारे दिल में अभी भी दर्द के अवशेष है| तो हम दूसरों को पूरी तरह से कैसे माफ कर सकते हैं? निम्नलिखित कदम हमें क्षमा करने की प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने में मदद करते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|पहले तीन चरण हम सावधानी से देखेंगे, अधिमानतः एक सहायक के साथ।}}&lt;br /&gt;
=== 1. क्या हुआ? ===&lt;br /&gt;
* विशेष रूप से बताएं कि क्या हुआ था।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम सामान्य और अस्पष्ट रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 2. मुझे क्या तकलीफ हुई? मुझे कैसा लगा? ===&lt;br /&gt;
* भावनाएँ महत्वपूर्ण हैं और हम कौन हैं इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं और सिर्फ तथ्यों से चिपके रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 3. पाप का नाम बताइए| ===&lt;br /&gt;
*अनुपयुक्त चीजों को नरम न करें और उचित सिद्ध न करें। पहचाने की दूसरे व्यक्ति ने किन चीजों के माध्यम से मेरे खिलाफ पाप किया है, जो उसने किया या नहीं किया।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती :&amp;lt;/i&amp;gt; हम दूसरे व्यक्ति को सही ठहराते हैं (लेकिन अगर हम इससे पाप नहीं कहते हैं तो क्षमा की प्राप्ति नहीं हो सकती)।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|अब हम प्रार्थना में जाते हैं और सब कुछ परमेश्वर के पास ले आते हैं।}}&lt;br /&gt;
=== 4. परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ===&lt;br /&gt;
*हम परमेश्वर, जो न्यायाधीश है उनके पास जाते हैं और उस व्यक्ति के खिलाफ आरोप लाते हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है।&lt;br /&gt;
हम अपना दिल परमेश्वर को देते हैं और उन्हें पहले तीन कदमो के सभी मुख्य बिंदुओं को बताते हैं।&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं, या हम अपनी भावनाओं को परमेश्वर से छिपा लेते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 5. क्षमा घोषित करें ===&lt;br /&gt;
*अब हम क्षमा याचना करते हैं (&amp;quot;मैं ___ को  _____के लिए माफ करता हूं&amp;quot;) और पूरे मामले को परमेश्वर के हाथों में सौंपने का निर्णय लेता हूं|&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम परमेश्वर को बताते हैं कि उस व्यक्ति के साथ क्या करना है (हम दूसरे व्यक्ति को शाप देते हैं)| या हम कहते हैं कि हम क्षमा करना चाहते हैं (&amp;quot;परमेश्वर, मुझे क्षमा करने में मदद करें&amp;quot;) लेकिन वास्तव में निर्णय नहीं लेते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ==&lt;br /&gt;
परमेश्वर न्यायाधीश है और हमें हर अन्याय को उनके सामने लाने का अधिकार है| हम निश्चित हो सकते हैं कि वह न्याय लाएगा और सभी को न्याय देगा - यह हमारा काम नहीं है| हमें दूसरों को वापस भुगतान करने या उनसे बदला लेने का कोई अधिकार नहीं है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
जिस तरह हम इस दुनिया में एक न्यायाधीश के सामने आरोप लाते हैं, उसी तरह हम परमेश्वर के सामने आरोप ला सकते हैं। हमें उन्हे अप्रसन्न करने से डरना नहीं है, लेकिन हम पूरी तरह से ईमानदार हो कर, अपनी सभी भावनाओं को दिखा सकते हैं। समाप्त होने के बाद, हम अपने सारे आरोपों को छोड़ दे और सब कुछ परमेश्वर  के हाथों में सौंप देते है| अब हम स्वयं दूसरे व्यक्ति का न्याय करना जारी नहीं रखते, लेकिन हम निर्णय परमेश्वर पर छोड़ देते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अधिक संकेत ==&lt;br /&gt;
;सहायक के सहारे का उपयोग करें  &lt;br /&gt;
:कुछ पहलुओं की अनदेखी किए बिना अकेले क्षमा की इस पूरी प्रक्रिया से गुजरना कठिन है| किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करें जो आपके साथ इन चरणों से गुजर सके और आपके साथ प्रार्थना कर सके!&lt;br /&gt;
;हमारे अपने पाप&lt;br /&gt;
:जब हम चोटिल होते हैं, तो हम अक्सर अनजाने में दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं और उनके विरुद्ध पाप करते हैं| इन बातों को अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि पश्चाताप करना और क्षमा मांगना महत्वपूर्ण है| अपने मन में आने वाली किसी भी चीज़ को जितनी जल्दी हो सके स्पष्ट करें!&lt;br /&gt;
;अपने आप को क्षमा करना&lt;br /&gt;
:कभी-कभी हम खुद पर क्रोधित होते हैं या किसी चीज के लिए खुद को दोषी मानते हैं। परमेश्वर हमें क्षमा करने के लिए और शुद्ध करने के लिए यीशु मसीह का माध्यम प्रदान करते है। खुद को माफ़ करने का मतलब है कि उसके  प्रस्ताव को लेना और उसे खुद पर लागू करना।&lt;br /&gt;
;परमेश्वर को &amp;quot;क्षमा&amp;quot; करना &lt;br /&gt;
:कभी-कभी हम परमेश्वर के बारे में नकारात्मक विचार रखते हैं या उस पर क्रोधित रहते हैं| परमेश्वर गलतियाँ नहीं करता, इसलिए हम उन्हें माफ नहीं कर सकते। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी निराशाओं और उसके प्रति नकारात्मक भावनाओं को छोड़ दें|&lt;br /&gt;
;चुनाव करना हर बार माफ़ करने का  &lt;br /&gt;
:यदि पुरानी भावनाएँ फिर से सामने आती हैं, तो अपने आप को याद दिलाएँ कि आपने पहले ही माफ कर दिया है और वे भावनाएँ बीत जाएँगी। हालांकि, यह संभव है कि चोट के अन्य पहलू या गहरी परतें हों जिन्हें आपने पहली बार संबोधित नहीं किया था। फिर हम एक बार फिर से क्षमा करने की प्रक्रिया से गुज़र सकते हैं ताकि ये क्षेत्र ठीक हो जाएं|&lt;br /&gt;
== खुद को परखो ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|परमेश्वर से निम्नलिखित प्रशन पूछे और नोट्स बनाने के लिए 2 मिनट का समय लें|:}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;परमेश्वर, मुझे किसे माफ़ करने की आवश्यकता है?&#039;&#039;&#039;&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
परमेश्वर की सुनें और अपने रिश्तों को ग़ौर से देखो (माता-पिता, परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी, सहपाठी, शिक्षक, नेता, खुद, परमेश्वर, ...)&lt;br /&gt;
मुझे चोट कैसे लगी और किससे हुई?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;background-color: #f9f9f9; border: 1px solid black; padding:5px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह पता लगाने के लिए संकेत कि क्या किसी व्यक्ति के साथ संबंध स्वस्थ है या अभी भी किसी तरह से टूटा हुआ है:&lt;br /&gt;
*उस व्यक्ति के बारे में सोचें: क्या आप उसे दिल से शुभकामनाएं दे सकते हैं?&lt;br /&gt;
*कल्पना कीजिए कि आप सड़क पर उस व्यक्ति से मिलेंगे: तो आपको कैसा लगेगा? क्या आप अभी भी मन में वैर-भाव रख रहे हो?&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अभ्यास ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|मुझे पहले कौन सी चोट को अभिभाषण करना है ?}}&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|इसमें मुझे कौन सहयोग/समर्थन करेगा ? विशेष रूप से स्पष्ट करें कि आप इसे कैसे जारी रखेंगे!}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{PdfDownload|कदम_दर_कदम_क्षमा_करना.pdf}}&lt;br /&gt;
{{OdtDownload|कदम_दर_कदम_क्षमा_करना.odt}}&lt;br /&gt;
{{Version|१.३}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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		<updated>2020-08-08T16:45:44Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;परमेश्वर से निम्नलिखित प्रशन पूछे और नोट्स बनाने के लिए 2 मिनट का समय लें|:&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Aksha</name></author>
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		<updated>2020-08-08T16:42:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Aksha: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;__NOTOC__&amp;lt;sidebar&amp;gt;sidebar-essentials&amp;lt;/sidebar&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;languages/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हम सभी गहरे और प्यार भरे रिश्तों के लिए तरसते हैं, लेकिन बदकिस्मती से हम सभी ने चोट अनुभव किया है और शायद दूसरों के द्वारा गाली भी खाई है| यह दर्दनाक है और हम इस दर्द  को सहते हैं। जिस तरह शारीरिक घाव संक्रमित और पकने लगते है, उसी तरह हमारे दिल में जो घाव है वह कड़वाहट में बदल सकते है, अगर हम उसपर कार्य न करे| सिर्फ समय सब कुछ सही नहीं कर सकता|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
इसके जवाब में हम अक्सर खुद को दूर कर लेते हैं और सुरक्षा के रूप में दीवारों का निर्माण कर लेते हैं। जिसके फल स्वरूप, हम किसी को भी हमारे करीब आने नहीं देते है और हम अलग हो जाते है| वैकल्पिक रूप से, हम गुस्से से प्रतिक्रिया करते है, दुसरो की गलतियों को पकड़कर और उससे बदला लेने की चाह रखते है| यह हमारे विचारों को उस चोट के साथ सेवन करने के लिए छोड़ देता है जो दूसरे व्यक्ति ने हमें दिया है।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
भविष्य में इन रणनीतियों का उपयोग करके, हम खुद को दुरुपयोग से बचाने की कोशिश करते है, लेकिन अंत में हम खुद को और भी अधिक चोट पहुंचाते हैं। इसके अलावा, अगर हम दुखी है तो हम दूसरों के साथ प्यार से व्यवहार नहीं करते| - &amp;lt;i&amp;gt;चोट खाए हुए लोग दूसरो को चोट पहुँचाते है &amp;lt;/i&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दुष्चक्र से पलायन केवल &amp;lt;i&amp;gt;क्षमा&amp;lt;/i&amp;gt; ही है, जो कि बहुत कठिन है अगर हमने अत्यधिक दर्द का अनुभव किया है। हालाँकि, जब तक हम क्षमा नहीं करते हैं तब तक हम उस व्यक्ति से बंधे रहते हैं जिसने हमें अतीत मे चोट पहुंचाई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम केवल दर्दनाक अनुभवों को नहीं भुला पा रहे है और केवल यादों को दबाने की कोशिश कर सकते है। लेकिन परमेश्वर चाहता है कि हम &amp;lt;i&amp;gt;मुक्त&amp;lt;/i&amp;gt; हों - कड़वाहट से मुक्त, बदला लेने की इच्छा से मुक्त, और अतीत के दर्द से मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा क्या है? ==&lt;br /&gt;
क्षमा किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ सभी तिरस्कार और आरोपों को जाने देना चुन रही है। मैंने उसे परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया। खुद निर्णय पारित करने के बजाय, मैं परमेश्वर पर भरोसा करता/करती हूं, वो ही न्यायधीश है, और उसे यह फैसला करने दें कि दूसरे व्यक्ति के साथ क्या होगा। इसका अर्थ यह भी है कि मैं अब दूसरे व्यक्ति के पापों को उसके खिलाफ नहीं गिनाऊंगा या उन्हें पकड़ कर रखूँगा| दूसरे शब्दों में, जैसा कि मैं पहले से ही जी रहा हूँ उसके पापों के परिणामों के साथ और अतीत को नहीं बदल सकता, मैं अब इसके साथ शांति बनाता हूं और दूसरे व्यक्ति को सभी ऋणों से मुक्त करता हूं।&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह फैसला मेरे अकेले का है| यह दूसरे व्यक्ति से पूरी तरह से स्वतंत्र है, चाहे वह क्षमा माँगे या नहीं या वह उपस्थित रहे या नहीं| हम उस व्यक्ति पर निर्भर नहीं हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
हालांकि क्षमा करना दूसरे व्यक्ति के लिए अच्छा है, पहले और सबसे पहले मैं इसे अपने अच्छे के लिए करता हूं| जब हम क्षमा करते हैं, तो हम भय, क्रोध, और कड़वाहट जैसी नकारात्मक भावनाओं से मुक्त हो जाते हैं और फिर चंगे हो कर पूरे हो जाते है|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== क्षमा करने के कदम ==&lt;br /&gt;
कभी-कभी जब हम जल्दबाजी में माफी मांगते हैं तो छोटा रास्ता लेते हैं लेकिन बाद में एहसास होता है कि हमारे दिल में अभी भी दर्द के अवशेष है| तो हम दूसरों को पूरी तरह से कैसे माफ कर सकते हैं? निम्नलिखित कदम हमें क्षमा करने की प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने में मदद करते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|पहले तीन चरण हम सावधानी से देखेंगे, अधिमानतः एक सहायक के साथ।}}&lt;br /&gt;
=== 1. क्या हुआ? ===&lt;br /&gt;
* विशेष रूप से बताएं कि क्या हुआ था।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम सामान्य और अस्पष्ट रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 2. मुझे क्या तकलीफ हुई? मुझे कैसा लगा? ===&lt;br /&gt;
* भावनाएँ महत्वपूर्ण हैं और हम कौन हैं इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती: &amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं और सिर्फ तथ्यों से चिपके रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 3. पाप का नाम बताइए| ===&lt;br /&gt;
*अनुपयुक्त चीजों को नरम न करें और उचित सिद्ध न करें। पहचाने की दूसरे व्यक्ति ने किन चीजों के माध्यम से मेरे खिलाफ पाप किया है, जो उसने किया या नहीं किया।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;i&amp;gt; सामान्य गलती :&amp;lt;/i&amp;gt; हम दूसरे व्यक्ति को सही ठहराते हैं (लेकिन अगर हम इससे पाप नहीं कहते हैं तो क्षमा की प्राप्ति नहीं हो सकती)।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|अब हम प्रार्थना में जाते हैं और सब कुछ परमेश्वर के पास ले आते हैं।}}&lt;br /&gt;
=== 4. परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ===&lt;br /&gt;
*हम परमेश्वर, जो न्यायाधीश है उनके पास जाते हैं और उस व्यक्ति के खिलाफ आरोप लाते हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है।&lt;br /&gt;
हम अपना दिल परमेश्वर को देते हैं और उन्हें पहले तीन कदमो के सभी मुख्य बिंदुओं को बताते हैं।&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम इस कदम को छोड़ देते हैं, या हम अपनी भावनाओं को परमेश्वर से छिपा लेते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== 5. क्षमा घोषित करें ===&lt;br /&gt;
*अब हम क्षमा याचना करते हैं (&amp;quot;मैं ___ को  _____के लिए माफ करता हूं&amp;quot;) और पूरे मामले को परमेश्वर के हाथों में सौंपने का निर्णय लेता हूं|&lt;br /&gt;
*&amp;lt;i&amp;gt;सामान्य गलतियाँ:&amp;lt;/i&amp;gt; हम परमेश्वर को बताते हैं कि उस व्यक्ति के साथ क्या करना है (हम दूसरे व्यक्ति को शाप देते हैं)| या हम कहते हैं कि हम क्षमा करना चाहते हैं (&amp;quot;परमेश्वर, मुझे क्षमा करने में मदद करें&amp;quot;) लेकिन वास्तव में निर्णय नहीं लेते हैं|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ ==&lt;br /&gt;
परमेश्वर न्यायाधीश है और हमें हर अन्याय को उनके सामने लाने का अधिकार है| हम निश्चित हो सकते हैं कि वह न्याय लाएगा और सभी को न्याय देगा - यह हमारा काम नहीं है| हमें दूसरों को वापस भुगतान करने या उनसे बदला लेने का कोई अधिकार नहीं है|&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
जिस तरह हम इस दुनिया में एक न्यायाधीश के सामने आरोप लाते हैं, उसी तरह हम परमेश्वर के सामने आरोप ला सकते हैं। हमें उन्हे अप्रसन्न करने से डरना नहीं है, लेकिन हम पूरी तरह से ईमानदार हो कर, अपनी सभी भावनाओं को दिखा सकते हैं। समाप्त होने के बाद, हम अपने सारे आरोपों को छोड़ दे और सब कुछ परमेश्वर  के हाथों में सौंप देते है| अब हम स्वयं दूसरे व्यक्ति का न्याय करना जारी नहीं रखते, लेकिन हम निर्णय परमेश्वर पर छोड़ देते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अधिक संकेत ==&lt;br /&gt;
;सहायक के सहारे का उपयोग करें  &lt;br /&gt;
:कुछ पहलुओं की अनदेखी किए बिना अकेले क्षमा की इस पूरी प्रक्रिया से गुजरना कठिन है| किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करें जो आपके साथ इन चरणों से गुजर सके और आपके साथ प्रार्थना कर सके!&lt;br /&gt;
;हमारे अपने पाप&lt;br /&gt;
:जब हम चोटिल होते हैं, तो हम अक्सर अनजाने में दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं और उनके विरुद्ध पाप करते हैं| इन बातों को अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि पश्चाताप करना और क्षमा मांगना महत्वपूर्ण है| अपने मन में आने वाली किसी भी चीज़ को जितनी जल्दी हो सके स्पष्ट करें!&lt;br /&gt;
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:कभी-कभी हम खुद पर क्रोधित होते हैं या किसी चीज के लिए खुद को दोषी मानते हैं। परमेश्वर हमें क्षमा करने के लिए और शुद्ध करने के लिए यीशु मसीह का माध्यम प्रदान करते है। खुद को माफ़ करने का मतलब है कि उसके  प्रस्ताव को लेना और उसे खुद पर लागू करना।&lt;br /&gt;
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:कभी-कभी हम परमेश्वर के बारे में नकारात्मक विचार रखते हैं या उस पर क्रोधित रहते हैं| परमेश्वर गलतियाँ नहीं करता, इसलिए हम उन्हें माफ नहीं कर सकते। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी निराशाओं और उसके प्रति नकारात्मक भावनाओं को छोड़ दें|&lt;br /&gt;
;चुनाव करना हर बार माफ़ करने का  &lt;br /&gt;
:यदि पुरानी भावनाएँ फिर से सामने आती हैं, तो अपने आप को याद दिलाएँ कि आपने पहले ही माफ कर दिया है और वे भावनाएँ बीत जाएँगी। हालांकि, यह संभव है कि चोट के अन्य पहलू या गहरी परतें हों जिन्हें आपने पहली बार संबोधित नहीं किया था। फिर हम एक बार फिर से क्षमा करने की प्रक्रिया से गुज़र सकते हैं ताकि ये क्षेत्र ठीक हो जाएं|&lt;br /&gt;
== खुद को परखो ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|परमेश्वर से निम्नलिखित प्रश्न पूछो और नोट्स बनाने के लिए 2 मिनट का समय लें:}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;परमेश्वर, मुझे किसे माफ़ करने की आवश्यकता है?&#039;&#039;&#039;&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
परमेश्वर की सुनें और अपने रिश्तों को ग़ौर से देखो (माता-पिता, परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी, सहपाठी, शिक्षक, नेता, खुद, परमेश्वर, ...)&lt;br /&gt;
मुझे चोट कैसे लगी और किससे हुई?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;background-color: #f9f9f9; border: 1px solid black; padding:5px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
यह पता लगाने के लिए संकेत कि क्या किसी व्यक्ति के साथ संबंध स्वस्थ है या अभी भी किसी तरह से टूटा हुआ है:&lt;br /&gt;
*उस व्यक्ति के बारे में सोचें: क्या आप उसे दिल से शुभकामनाएं दे सकते हैं?&lt;br /&gt;
*कल्पना कीजिए कि आप सड़क पर उस व्यक्ति से मिलेंगे: तो आपको कैसा लगेगा? क्या आप अभी भी मन में वैर-भाव रख रहे हो?&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अभ्यास ==&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|मुझे पहले कौन सी चोट को अभिभाषण करना है ?}}&amp;lt;br/&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Translatable template|Italic|इसमें मुझे कौन सहयोग/समर्थन करेगा ? विशेष रूप से स्पष्ट करें कि आप इसे कैसे जारी रखेंगे!}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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		<author><name>Aksha</name></author>
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