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कदम दर कदम क्षमा करना

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हम सभी गहरे और प्यार भरे रिश्तों के लिए तरसते हैं, लेकिन बदकिस्मती से हम सभी ने चोट अनुभव किया है और शायद दूसरों के द्वारा गाली भी खाई है| यह दर्दनाक है और हम इस दर्द को सहते हैं। जिस तरह शारीरिक घाव संक्रमित और पकने लगते है, उसी तरह हमारे दिल में जो घाव है वह कड़वाहट में बदल सकते है, अगर हम उसपर कार्य न करे| सिर्फ समय सब कुछ सही नहीं कर सकता|
इसके जवाब में हम अक्सर खुद को दूर कर लेते हैं और सुरक्षा के रूप में दीवारों का निर्माण कर लेते हैं। जिसके फल स्वरूप, हम किसी को भी हमारे करीब आने नहीं देते है और हम अलग हो जाते है| वैकल्पिक रूप से, हम गुस्से से प्रतिक्रिया करते है, दुसरो की गलतियों को पकड़कर और उससे बदला लेने की चाह रखते है| यह हमारे विचारों को उस चोट के साथ सेवन करने के लिए छोड़ देता है जो दूसरे व्यक्ति ने हमें दिया है।
भविष्य में इन रणनीतियों का उपयोग करके, हम खुद को दुरुपयोग से बचाने की कोशिश करते है, लेकिन अंत में हम खुद को और भी अधिक चोट पहुंचाते हैं। इसके अलावा, अगर हम दुखी है तो हम दूसरों के साथ प्यार से व्यवहार नहीं करते| - चोट खाए हुए लोग दूसरो को चोट पहुँचाते है

इस दुष्चक्र से पलायन केवल क्षमा ही है, जो कि बहुत कठिन है अगर हमने अत्यधिक दर्द का अनुभव किया है। हालाँकि, जब तक हम क्षमा नहीं करते हैं तब तक हम उस व्यक्ति से बंधे रहते हैं जिसने हमें अतीत मे चोट पहुंचाई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम केवल दर्दनाक अनुभवों को नहीं भुला पा रहे है और केवल यादों को दबाने की कोशिश कर सकते है। लेकिन परमेश्वर चाहता है कि हम मुक्त हों - कड़वाहट से मुक्त, बदला लेने की इच्छा से मुक्त, और अतीत के दर्द से मुक्त हों।

क्षमा क्या है?

क्षमा किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ सभी तिरस्कार और आरोपों को जाने देना चुन रही है। मैंने उसे परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया। खुद निर्णय पारित करने के बजाय, मैं परमेश्वर पर भरोसा करता/करती हूं, वो ही न्यायधीश है, और उसे यह फैसला करने दें कि दूसरे व्यक्ति के साथ क्या होगा। इसका अर्थ यह भी है कि मैं अब दूसरे व्यक्ति के पापों को उसके खिलाफ नहीं गिनाऊंगा या उन्हें पकड़ कर रखूँगा| दूसरे शब्दों में, जैसा कि मैं पहले से ही जी रहा हूँ उसके पापों के परिणामों के साथ और अतीत को नहीं बदल सकता, मैं अब इसके साथ शांति बनाता हूं और दूसरे व्यक्ति को सभी ऋणों से मुक्त करता हूं।
यह फैसला मेरे अकेले का है| यह दूसरे व्यक्ति से पूरी तरह से स्वतंत्र है, चाहे वह क्षमा माँगे या नहीं या वह उपस्थित रहे या नहीं| हम उस व्यक्ति पर निर्भर नहीं हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है|
हालांकि क्षमा करना दूसरे व्यक्ति के लिए अच्छा है, पहले और सबसे पहले मैं इसे अपने अच्छे के लिए करता हूं| जब हम क्षमा करते हैं, तो हम भय, क्रोध, और कड़वाहट जैसी नकारात्मक भावनाओं से मुक्त हो जाते हैं और फिर चंगे हो कर पूरे हो जाते है|

क्षमा करने के कदम

कभी-कभी जब हम जल्दबाजी में माफी मांगते हैं तो छोटा रास्ता लेते हैं लेकिन बाद में एहसास होता है कि हमारे दिल में अभी भी दर्द के अवशेष है| तो हम दूसरों को पूरी तरह से कैसे माफ कर सकते हैं? निम्नलिखित कदम हमें क्षमा करने की प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने में मदद करते हैं|

पहले तीन चरण हम सावधानी से देखेंगे, अधिमानतः एक सहायक के साथ।

1. क्या हुआ?

  • विशेष रूप से बताएं कि क्या हुआ था।
  • सामान्य गलती: हम सामान्य और अस्पष्ट रहते हैं।

2. मुझे क्या तकलीफ हुई? मुझे कैसा लगा?

  • भावनाएँ महत्वपूर्ण हैं और हम कौन हैं इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • सामान्य गलती: हम इस कदम को छोड़ देते हैं और सिर्फ तथ्यों से चिपके रहते हैं।

3. पाप का नाम बताइए|

  • अनुपयुक्त चीजों को नरम न करें और उचित सिद्ध न करें। पहचाने की दूसरे व्यक्ति ने किन चीजों के माध्यम से मेरे खिलाफ पाप किया है, जो उसने किया या नहीं किया।
  • सामान्य गलती : हम दूसरे व्यक्ति को सही ठहराते हैं (लेकिन अगर हम इससे पाप नहीं कहते हैं तो क्षमा की प्राप्ति नहीं हो सकती)।

अब हम प्रार्थना में जाते हैं और सब कुछ परमेश्वर के पास ले आते हैं।

4. परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ

  • हम परमेश्वर, जो न्यायाधीश है उनके पास जाते हैं और उस व्यक्ति के खिलाफ आरोप लाते हैं जिसने हमें चोट पहुंचाई है।

हम अपना दिल परमेश्वर को देते हैं और उन्हें पहले तीन कदमो के सभी मुख्य बिंदुओं को बताते हैं।

  • सामान्य गलतियाँ: हम इस कदम को छोड़ देते हैं, या हम अपनी भावनाओं को परमेश्वर से छिपा लेते हैं।

5. क्षमा घोषित करें

  • अब हम क्षमा याचना करते हैं ("मैं ___ को _____के लिए माफ करता हूं") और पूरे मामले को परमेश्वर के हाथों में सौंपने का निर्णय लेता हूं|
  • सामान्य गलतियाँ: हम परमेश्वर को बताते हैं कि उस व्यक्ति के साथ क्या करना है (हम दूसरे व्यक्ति को शाप देते हैं)| या हम कहते हैं कि हम क्षमा करना चाहते हैं ("परमेश्वर, मुझे क्षमा करने में मदद करें") लेकिन वास्तव में निर्णय नहीं लेते हैं|

परमेश्वर के पास अन्याय के आरोप लाओ

परमेश्वर न्यायाधीश है और हमें हर अन्याय को उनके सामने लाने का अधिकार है| हम निश्चित हो सकते हैं कि वह न्याय लाएगा और सभी को न्याय देगा - यह हमारा काम नहीं है| हमें दूसरों को वापस भुगतान करने या उनसे बदला लेने का कोई अधिकार नहीं है|
जिस तरह हम इस दुनिया में एक न्यायाधीश के सामने आरोप लाते हैं, उसी तरह हम परमेश्वर के सामने आरोप ला सकते हैं। हमें उन्हे अप्रसन्न करने से डरना नहीं है, लेकिन हम पूरी तरह से ईमानदार हो कर, अपनी सभी भावनाओं को दिखा सकते हैं। समाप्त होने के बाद, हम अपने सारे आरोपों को छोड़ दे और सब कुछ परमेश्वर के हाथों में सौंप देते है| अब हम स्वयं दूसरे व्यक्ति का न्याय करना जारी नहीं रखते, लेकिन हम निर्णय परमेश्वर पर छोड़ देते हैं।

अधिक संकेत

सहायक के सहारे का उपयोग करें
कुछ पहलुओं की अनदेखी किए बिना अकेले क्षमा की इस पूरी प्रक्रिया से गुजरना कठिन है| किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करें जो आपके साथ इन चरणों से गुजर सके और आपके साथ प्रार्थना कर सके!
हमारे अपने पाप
जब हम चोटिल होते हैं, तो हम अक्सर अनजाने में दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं और उनके विरुद्ध पाप करते हैं| इन बातों को अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि पश्चाताप करना और क्षमा मांगना महत्वपूर्ण है| अपने मन में आने वाली किसी भी चीज़ को जितनी जल्दी हो सके स्पष्ट करें!
अपने आप को क्षमा करना
कभी-कभी हम खुद पर क्रोधित होते हैं या किसी चीज के लिए खुद को दोषी मानते हैं। परमेश्वर हमें क्षमा करने के लिए और शुद्ध करने के लिए यीशु मसीह का माध्यम प्रदान करते है। खुद को माफ़ करने का मतलब है कि उसके प्रस्ताव को लेना और उसे खुद पर लागू करना।
परमेश्वर को "क्षमा" करना
कभी-कभी हम परमेश्वर के बारे में नकारात्मक विचार रखते हैं या उस पर क्रोधित रहते हैं| परमेश्वर गलतियाँ नहीं करता, इसलिए हम उन्हें माफ नहीं कर सकते। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी निराशाओं और उसके प्रति नकारात्मक भावनाओं को छोड़ दें|
चुनाव करना हर बार माफ़ करने का
यदि पुरानी भावनाएँ फिर से सामने आती हैं, तो अपने आप को याद दिलाएँ कि आपने पहले ही माफ कर दिया है और वे भावनाएँ बीत जाएँगी। हालांकि, यह संभव है कि चोट के अन्य पहलू या गहरी परतें हों जिन्हें आपने पहली बार संबोधित नहीं किया था। फिर हम एक बार फिर से क्षमा करने की प्रक्रिया से गुज़र सकते हैं ताकि ये क्षेत्र ठीक हो जाएं|

खुद को परखो

परमेश्वर से निम्नलिखित प्रशन पूछे और नोट्स बनाने के लिए 2 मिनट का समय लें-:

परमेश्वर, मुझे किसे माफ़ करने की आवश्यकता है?
परमेश्वर की सुनें और अपने रिश्तों का विश्लेषण करें (माता-पिता, परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी, सहपाठी, शिक्षक, नेता, खुद, परमेश्वर, ...) मुझे चोट कैसे लगी और किससे हुई?

यह पता लगाने के लिए संकेत कि क्या उस व्यक्ति के साथ संबंध स्वस्थ है या अभी भी किसी तरह से टूटा हुआ है:

  • उस व्यक्ति के बारे में सोचें-: क्या आप उसे दिल से शुभकामनाएं दे सकते हैं?
  • कल्पना कीजिए कि आप सड़क पर उस व्यक्ति से मिलेंगे-: आपको कैसा लगेगा? क्या आप अभी भी मन में वैर-भाव रख रहे हो?

अभ्यास

मुझे पहले कौन सी चोट को अभिभाषण करना है ?
इसमें मुझे किसका सहयोग मिलना चाहिए? विशेष रूप से स्पष्ट करें कि आप इसे कैसे जारी रखेंगे!